Herbal Tea For Lungs: फेफड़ों को साफ करने के साथ प्रदूषण से बचाएगी ये हर्बल चाय

Herbal Tea For Lungs Detox: जैसे ही तापमान में गिरावट आती है, वैसे ही हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। सर्द मौसम के साथ हवा की गुणवत्ता इतनी गिर जाती है, कि लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। प्रदूषण अगर सांस के ज़रिए फेफड़ों में चला जाए, तो इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया और ऐसी ही फेफड़ों से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए इस मौसम में अपने फेफड़ों को धूल के कणों से बचाना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।  

वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर चिंता जताते हुए, लाइफस्टाइल और वेलनेस कोच ल्यूक कॉउटिन्हो ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक घरेलू उपाय साझा किया जो आपके फेफड़ों को साफ करने में मदद कर सकता है। ल्यूक ने अपनी पोस्ट में एक विशेष चाय का उल्लेख किया है जो आपके फेफड़ों को साफ रखने और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।



इस चाय को पीने के फायदे

ये चाय ऐसे प्राकृतिक मसालों और औषधियों को मिलाकर बनती है, जो घर में आसानी से मिल जाते हैं और अपने औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं। इस चाय को पीने से प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिलती है, जो इस समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, ये ऐसा वक्त है जब कोरोना वायरस ​​मामलों की संख्या बढ़ने के साथ फ्लू के मामले भी आने शुरू होंगे। 

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इसके लिए आपको चाहिए

एक अंच कद्दूकस किया हुआ अदरक

दालचीनी की एक छोटा टुकड़ा

आधा छोटा चम्मच तुसली के पत्ते

एक छोटा चम्मच ऑरीगैनो

तीन काली मिर्च

दो हरी इलाइची कुचली हुई

1/4 छोटा चम्मच सौंफ

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चुटकी भर अजवाइन 

1/4th छोटा चम्मच  ज़ीरा


ऐसे बनाएं हर्बल चाय

एक गहरे पैन में एक ग्लास पानी के साथ ये सभी चीज़ें डाल दें। इस काढ़े को 10 मिनट तक उबलने दें और फिर छान कर एक कप में डाल लें।  चाय का स्वाद बेहतर करने के लिए आप इसमें ऑरगैनिक या कच्चा शहद या फिर गुड मिला सकते हैं। इम्यूनिटी को बढ़ावा और फेफड़ों को साफ करन के लिए सुबह दूध वाली चाय या फिर कॉफी पीने की जगह इसे पिएं। इस हर्बल चाय को दिन में एक बार पीना ही काफी है।


सुदीर्धजीवी शासनश्री संयमज्येष्ठा साध्वीश्री बिदामां जी एक परिचय

 🎌 सुदीर्धजीवी शासनश्री संयमज्येष्ठा साध्वीश्री बिदामां जी एक परिचय :-



🔸 जन्म - विक्रम संवत 1975 कार्तिक कृष्णा 04 

🔹 जन्म स्थान - सरेवड़ी (मेवाड़)

🔸 पिता का नाम - वृद्धि चन्द जी चावत

🔹 माता का नाम - हजां बाई चावत

🏮 शादी -पिंपली निवासी हेमराज जी दक के साथ हुई शादी के 06 महीने बाद हेमराज जी की मृत्यु हो गई।


⚜🔺 दीक्षा - विक्रम संवत 1998 कार्तिक कृष्णा 09 आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से। 


⚜🔺 शासनश्री अलंकरण- विक्रम संवत 2069 भाद्रपद शुक्ला 09 आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा।


👁‍🗨 विशेष -

🎴 शासनश्री जी 04 नवम्बर 2020 को 103 वें वर्ष में प्रवेश कर रही है जो की तेरापन्थ धर्म संघ के 261 वर्ष के इतिहास में एक रिकार्ड बनने जा रहा है। ऐसा इतिहास बताता है की आचार्य भिक्षु से आचार्य महाश्रमण जी के बरतारे में 103 वां वर्ष इनको ही आ रहा है......।।

🎖संयम पर्याय से वर्तमान में धर्म संघ में संयम जयेष्ठा है।

🎖 चार आचार्यों की सेवा की है।

🎖आठ आचार्यों द्वारा दीक्षित साधु साध्वियों को देखा है।

🎖 शासनश्री जी आज भी महीने में 5 उपवास करते है।

🎖 साध्वी चर्या में पूर्ण सजग है आज भी मंगल पाठ सुनाते है और बैठे-बैठे पात्री आदि कार्य करते है।


🎖 अभी शासनश्री जी कालू (बिकानेर) में साध्वीश्री उज्जवलरेखा जी के साथ विराज रहे है।


📍 नोट - शासनश्री साध्वी श्री बिदामां जी ने गृहस्थ अवस्था मे आचार्य श्री कालूगणी के दर्शन किये थे, उस दृष्टि से चार आचार्य की सेवा समझे। साधु जीवन मे तीन आचार्यो की सेवा।


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गिरनार के 9999 चरण (पगथिया) कब और किसके द्वारा बनाए गए थे ? जानें इसका पूरा इतिहास

 गिरनार के 9999 चरण (पगथिया) कब और किसके द्वारा बनाए गए थे ? जानें इसका पूरा इतिहास 

जब बात जूनागढ़ की हो, तो दिमाग में एक ही बात आती है, कि जूनागढ़ का गौरव, गिरनार सभी के लिए आस्था का प्रतीक है।

गिरनार पर चढ़ने के लिए हर साल लाखों भक्त आते हैं। 


गिरनार पर…

श्री नेमिनाथदादा की टुंक (कुल 14 टुंक), 

श्री अंबिका माँ और ... 

शीर्ष पर ... 

श्री नेमिनाथदादा का मोक्ष कल्याणक टुंक और ... 

श्री दत्तात्रेय का निवास है। 





आपने भी कई बार गिरनार के पगथिये चूमे होंगे, 
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ...।

किसने बनाये ये सब पगथिये ? 

कैसे बनाये है ..?


तो आइए जानते हैं पूरा इतिहास..

गिरनार के निर्माण और उसके पगथियों से जुड़ा एक लंबा इतिहास है। हम सभी जानते हैं कि गिरनार गुजरात का सबसे ऊँचा पर्वत है। लोग यात्रा करने के लिए पूरे वर्ष यहां आते हैं और लोग देवदीवली के समय लीली परिक्रमा का आनंद भी लेते हैं।


यह सदियों पहले की बात है जब गुजरात को जीत दिलाने के बाद उदयन मंत्री रणछ्वानी में थे। लेकिन उसका शरीर लड़ाई में घायल हो गया था। इस दौरान युद्ध से विजयी होकर लौटते समय उनकी मृत्यु हो गई। उस वक्त उन्होंने अपने बेटे को एक पत्र दिया था।

जब उनके बेटे ने संदेश पढ़ा, तो उसमें उन्होंने कहा था कि, "मेरी इच्छा है कि शैत्रुजंय में उगादिदेव मंदिर का जीर्णोद्धार और गिरनार मंदिर तक चढ़ने के लिए पगथीये बनाए जाए।"


अपने पिता के इस संदेश को पढ़ने के बाद, उनके बेटे बाहड मन्त्री ने शत्रुजंय पे उगादिदेव का मंदिर बनवाया। उन्होंने महात्म्य उदयन की एक इच्छा पूरी की। लेकिन अब गिरनार मंदिर पर रस्ता बनाना बाकी था। वह इच्छा अभी पूरी होनी बाकी थी।


उनके पिता के अनुसार, बाहड मंत्री गिरनार में पगडंडी बनाने के लिए जूनागढ़ आए थे। यहां उन्होंने पहाड़ पर ऊंची चट्टानें देखीं। उन्होंने पर्वत की विशालता और बादलों से बात करते हुए चोटियों को देखा। यह सब देखकर, वे शुरू में उलझन में थे कि इतने बड़े पहाड़ पर रस्ता कैसे बनाया जाए। उनके साथ आए मूर्तिकारों ने कड़ी मेहनत की लेकिन किसी को समझ नहीं आया कि सड़क को कहां से शुरू किया जाए।


बाहड मंत्री ने बहुत सोचा लेकिन उसे समझ नहीं आया कि गिरनार के लिए रस्ता कहाँ से पार करें। तब उन्हें गिरनार के रक्षक मां अंबा की याद आई। वे संकल्प करके माँ अम्बा के चरणों में बैठ गए। उसके दिमाग में बस यही था कि मां तुम मुझे रास्ता दिखाओ कि मैं कैसे गिरनार पर चढ़ने के लिए कदम बढ़ा सकता हूं। ताकि मैं अपने पिता से किए गए वादे से मुक्त हो सकूं।


उन्होंने माँ का आशीर्वाद पाने के लिए उपवास करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, तीन दिन बीत गए और मंत्री को भरोसा हो गया कि अप्रत्याशित रूप से मेरी माँ इस समस्या का समाधान करेगी। और ऐसा ही हुआ, उनका विश्वास सही निकला। तीसरे उपवास के दिन, माँ अम्बा प्रकट हुईं और कहाँ मे जिस रास्ते पे चावल डालती जाउ वहाँ रास्ता (पगथीये) बनाने के लिए कहा।

यह सुनकर मंत्री जी बहुत खुश हुए। खुशी ने माहौल को आनंद से भर दिया। मां अंबिका मुश्किल रास्तों के बीच में चावल डालने के लिए गिरनार गई और रास्ते में चावल डालते गईं और वहाँ रास्ता मिलता गया। एक क्षण ऐसा भी आया जब आत्मनिरीक्षण की आवाज गूंज उठी। ऐसा करने के बाद बाहड मंत्री कर्ज राहत की खुशी मनाई और उस जमाने मे त्रेसठ लाख रुपये के खर्च करने के बाद यह पगथिये बने।


दोस्तों, मैं आपको बता दूं कि आज हम गिरनार की यात्रा इतनी आसानी से कर सकते हैं कि केवल बाहड मंत्री की वजह से। गिरनार पर पगथिये और रस्ता बनाने वाले उस शख्स का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिसके कारण हम आसानी से श्री नेमिनाथदादा, श्री अम्बिका माँ और दत्तात्रेय के दर्शन कर सकते हैं।


🙏 जय गिरनार .. जय नेमिनाथ  जय माता दी🙏

      

ऐसा क्या हुआ की 2480 करोड़ की मालकिन सब्जियां बेच रही है

अनुकरणीय है- नारायण मूर्ति दंपत्ति की सादगी

विनम्रता जब उभरती है, अहम लुप्त होता है....

तो महान व्यक्तित्व उभरता है!!

2 दिन पूर्व ट्विटर पर इंफोसिस के मालिक नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति की सब्जियां बेचते हुए फोटो वायरल हो गई। बाद में पड़ताल हुई तो पता चला कि वास्तव में फोटो सुधा मूर्ति की ही है, जो 2480 करोड रुपए की मालकिन है।

"किंतु वे सब्जीयां क्यों बेच रही हैं?"

तो उसका उत्तर मिला "वह राघवेंद्र मठ (मंदिर) में प्रति वर्ष 3 दिन के लिए आती हैं,चुपचाप। वहां पर फल सब्जी काटना, व्यवस्थित करना, रसोई के काम में लगना, यह सब काम करती हैं, स्वयं अपने हाथ से।

जब उनसे पूछा गया "यह क्या है, आप क्यों ऐसा करती हैं?"  तो उन्होंने कहा "यह अपने अहम को मारने की एक विधि है, जो मैंने पंजाब में गुरुद्वारे में होने वाली कार सेवा को देखकर सीखी है। पैसों का दान देना भी अच्छी बात है,किंतु स्वयं शारीरिक श्रम करना व सामान्य लोगों के साथ,सामान्य लोगों की तरह, तीन-चार दिन रहना, यह मेरे अहंकार की वृद्धि नहीं होने देता। वर्ष भर मैं इसके कारण से सेवा भाव में रहती हूं।"

 वह कितना व कहां कहाँ दान करती हैं, कैसे करती हैं, वह नहीं बताना चाहती।(यह निश्चित है कि वह करोड़ों में है)

स्वयं नारायण मूर्ति को जो 68 वर्ष के हो गए हैं,को एक कार्यक्रम में 78 वर्षीय रतन टाटा के पैर छूते हुए,दो वर्ष पूर्व, सब ने देखा है।विनम्रता जब उभरती है, तो ऐसी घटनाएं सामान्य होती हैं।

 जब मैंने सारा देखा, पढ़ा, तो मैं भी सोच में पड़ गया कि क्या इतने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद ऐसा करना संभव है?कितना कठिन है कि जिनके नोकरों के पास भी SUV कारें हों, आलीशान बंगले हैं, वह महिला सामान्य कारसेवक महिलाओं के साथ उसी तरह काम करे व 15-16साल से किसी को पता भी न चले, धन्य धन्य!

सुधा मूर्ति राघवेंद्र मठ में सब्जियों के साथ!!और  नारायण मूर्ति ,रतन टाटा के पैर छूते हुए।



माँ गायत्री के ये 24 मंत्र भी हैं जिनमें हैं 24 देवताओं का वास

 #गायत्री_मंत्र के अलावा गायत्री के ये 24 मंत्र भी हैं जिनमें हैं 24 देवताओं का वास, इन मंत्रों के जप से हो जाता हैं सभी कष्टों का नाश । भूत प्रेत, चोर डाकू, राज कोप, आशंका, भय, अकाल मृत्यु, रोग और अनेक प्रकार की बाधाओं का निवारण करके मनुष्य को सदैव तेजश्वी बनाय रखता है । इन मंत्रों को प्रतिदिन जपने से सुख, सौभाग्य, समृद्धि और ऎश्वर्य की होती हैं प्राप्ति ।


1- #गणेश_गायत्री:- यह मंत्र समस्त प्रकार के विघ्नों का निवारण करने में सक्षम है ।

मंत्र-

।। ॐ एक दृष्टाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात् ।।


2- #नृसिंह_गायत्री:- इस मंत्र से पुरषार्थ एवं पराक्रम की बृद्धि होती है ।

मंत्र-

।। ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात् ।।


 


3- #विष्णु_गायत्री:- यह मंत्र पारिवारिक कलह को समाप्त करता है ।

मंत्र-

।। ॐ नारायण विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु: प्रचोदयात् ।।


4- #शिव_गायत्री:- यह मंत्र सभी प्रकार का कल्याण करने में अद्भूत कार्य कर्ता है ।

मंत्र-

।। ॐ पंचवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्र: प्रचोदयात् ।।


5- #कृष्ण_गायत्री:- यह मंत्र कर्म क्षेत्र की सफलता हेतु बड़ा ही लाभकारी है ।

मंत्र-

।। ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात् ।।


6- #राधा_गायत्री:- यह मंत्र प्रेम का अभाव दूर करके पूर्णता प्रदान करता है ।

मंत्र-

।। ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात् ।।


7- #लक्ष्मी_गायत्री:- यह मंत्र पद प्रतिष्ठा, यश ऐश्वर्य और धन सम्पति प्रदान करता हैं

मंत्र-

।। ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।।


8- #अग्नि_गायत्री:- यह मंत्र इंद्रियों की तेजस्विता को बढ़ाता है ।

मंत्र-

।। ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्नि: प्रचोदयात् ।।


9- #इन्द्र_गायत्री:- यह मंत्र दुश्मनों के हमले से बचाता है ।

मंत्र-

।। ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि। तन्नो इन्द्र: प्रचोदयात् ।।

10- #सरस्वती_गायत्री:- इस मंत्र से ज्ञान बुद्धि की वृद्धि होती है एवं स्मरण शक्ति बढ़ती है ।

मंत्र-

।। ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ।।


11- #दुर्गा_गायत्री:- यह मंत्र दुखः, पीड़ा ही नहीं शत्रुओं का नाश, विघ्नों पर विजय दिलाता हैं ।

मंत्र-

।। ॐ गिरिजायै विद्महे शिवप्रियायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।


12- #हनुमान_गायत्री:- यह मंत्र कर्म के प्रति निष्ठा की भावना जागृत करता हैं ।

मंत्र-

।। ॐ अंजनी सुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो मारुति: प्रचोदयात् ।।

 

13- #पृथ्वी_गायत्री:- यह मंत्र दृढ़ता, धैर्य और सहिष्णुता की वृद्धि करता है ।

मंत्र-

।। ॐ पृथ्वीदेव्यै विद्महे सहस्त्रमूत्यै धीमहि। तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात् ।।


14- #सूर्य_गायत्री:- इस मंत्र से शरीर के सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है ।

मंत्र-

।। ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि । तन्नो सूर्य: प्रचोदयात् ।।


 15- #राम_गायत्री:- इस मंत्र से मान प्रतिष्ठा बढती है ।

मंत्र-

।। ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो राम: प्रचोदयात् ।।


16- #सीता_गायत्री:- यह मंत्र तप की शक्ति में वृद्धि करता है ।

मंत्र-

।। ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात् ।।


17- #चन्द्र_गायत्री:- यह मंत्र निराशा से मुक्ति दिलाता है और मानसिकता भी प्रबल होती है ।

मंत्र-

।। ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतत्त्वाय धीमहि। तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात् ।।

18- #यम_गायत्री:- इस मंत्र से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है ।

मंत्र-

।। ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि । तन्नो यम: प्रचोदयात् ।।


19- #ब्रह्मा_गायत्री:- इस मंत्र से व्यापारिक संकट दूर हो जात है ।

मंत्र-

।।ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारुढ़ाय धीमहि। तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ।।


20- #वरुण_गायत्री:- यह मंत्र व्यक्ति के भीतर प्रेम भावना जागृत करता है, जिससे भावनाओं का उदय होता हैं ।

मंत्र-

।। ॐ जलबिम्वाय विद्महे नीलपुरुषाय धीमहि। तन्नो वरुण: प्रचोदयात् ।।


20- #नारायण_गायत्री:- यह मंत्र प्रशासनिक प्रभाव बढ़ता है ।

मंत्र-

।। ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो नारायण: प्रचोदयात् ।।


22- #हयग्रीव_गायत्री:- यह मंत्र समस्त भयो का नाश करता है ।

।। ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि । तन्नो हयग्रीव: प्रचोदयात् ।।


23- #हंस_गायत्री:- इस मंत्र से विवेक शक्ति का विकाश होता है, बुद्धि भी प्रखर होती है ।

मंत्र-

।। ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि। तन्नो हंस: प्रचोदयात् ।।


24- #तुलसी_गायत्री:- इस मंत्र से परमार्थ की भावना जाग्रत होती हैं ।

।। ॐ श्रीतुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि । तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।


#गायत्री_साधना का प्रभाव तत्काल होता है जिससे साधक को आत्मबल की प्राप्ति होती है और मानसिक कष्ट में तुरन्त शान्ति मिलती है । इस #महामन्त्र के प्रभाव से आत्मा में सतोगुण बढ़ता है । गायत्री की महिमा के सम्बन्ध में कहा गया हैं कि ब्रह्म की जितनी भी महिमा है, वह सब गायत्री की भी मानी जाती हैं । वेदमाता गायत्री सभी की दुर्बुद्धि को मिटाकर सबको सद्बुद्धि प्रदान करने वाली हैं ।

(#हिन्दू_शास्त्रीय_मान्यता)

Topic माता jain Quiz

टॉपिक -:माता

1️⃣ किस माता ने पुत्र का जन्म होते ही उसका लालन पालन पति से छुपाकर करवाया था 

🅰️। पद्यावती—— कनकध्वज


2️⃣ किस माता ने पुत्र के बराबर सोना लेकर बेचा था 🅰️— भद्रा—- अमरकुमार 

३किस माता के आँसु ने पुत्र को वेरागी बनाया 

🅰️मेनावती—— गोपीचंद 


4️⃣ किस माता ने अपने पुत्र को ज़िंदा जलाने लाछाग्रह बनाया था 

🅰️। चुलनी। —- बलदत 


5️⃣ किस माता ने अपने पुत्र को मुनि के गोचरी आते ही बोहरा दिया 

🅰️। सुन्नदा — वज्रकुमार 


6️⃣ किस माता ने पुत्र का साथ लेकर अपने पति को मार डालने का सोचा 

🅰️। सूरिकांता — सूर्यकांत कुमार 


7️⃣ की माता ने अपने ६ साल के पुत्र को दिछा लेने की छुट्टी दी 

🅰️ श्रीदेवी — अईमुताकुमार 


8️⃣ की माता ने अपने मुनि पुत्र से कहा था कि तू अब मुझे छोड़कर दूसरी माता मत करना  

🅰️देवकी — गजसुकुमाल

यहाँ पढे ⏬⏬

9️⃣ किस माता ने जंगल में पुत्र को जन्म दिया जिसका लालन पालन पद्यरथ राजा के यहाँ हुआ 

🅰️। मयनरेहां — नमिकुमार 


1️⃣0️⃣। किस माता ने दो पुत्रों को हाथी के लिये लड़ते रोका  

🅰️। मयणरेहा - चंद्रयस ओर नमिराज  



जिन आज्ञा विरुद्ध कुछ भी लिखा ✍ हो तो मिच्छामि दुक्कडं🙏

☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆

धर्मनिष्ठ सुश्राविका निर्मला बहन नवीन जी नाहर ने 94 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए

 रतलाम, मध्यप्रदेश

धर्मदास गण नायक, आगम विशारद, बुद्धपुत्र, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री जिनेन्द्रमुनि जी म.सा.की आज्ञानुवर्तीनी सौम्यमूर्ति,परम विदूषी पूज्या महासती श्री मधुबालाजी म.सा.आदि ठाना -6 श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल,नोलाईपुरा पर सुखसाता पुर्वक विराजित है !

आपश्री के पावन सानिध्य में जप तप त्याग स्वाध्याय आदि आराधना निरन्तर गतिमान है !

🏳️‍🌈 आज 92 वां उपवास🏳️‍🌈

तपस्वी रत्ना धर्मनिष्ठ सुश्राविका निर्मला बहन नवीन जी नाहर के आज 92 उपवास की दीर्घ तपस्या चल रही है ओर आपने आज 94 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण कर लिए है!

उल्लेखनीय है कि धर्मनिष्ठ सुश्राविका श्रीमती निर्मला नवीन जी नाहर पूर्व में भी कई दीर्घ तपस्या कर चुकी है जिसमें सर्वाधिक 125 उपवास की तपस्या वर्ष 2018 में करी थी।

धन्य है नाहर परिवार जो इन विषम परिस्थितियों में भी अपने परिवार में दीर्घ तपस्या में सहयोगी बने।

यहाँ पढे ⬇⬇⬇


महामारी के इस कठिन काल मे सभी नकारात्मक प्रचार से अप्रभावित रहते हुए, जिन धर्म के प्रति दृढ श्रद्धा रखकर, तपस्या करने करने वालो सभी तपस्वीयो को कोटि कोटि धन्यवाद🙏🏻🙏🏻

खूब खूब अनुमोदना


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श्री धर्मदास जैन श्री संघ,रतलाम

संत शिरोमणि गीतार्थ तपस्वी की उपाधि से अलंकृत किया

 ❗ संत शिरोमणि गीतार्थ तपस्वी

                   की उपाधि से अलंकृत किया❗


 इंदौर ( म. प्र.)01/11/20

 पूज्य गुरुदेव ,महान अभिग्रहधारी,सर्व धर्म दिवाकर,शेरे पंजाब,वर्तमान के गुरुवेणी श्री राजेशमुनिजी म.सा को 

श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ , क्लर्क कॉलोनी इंदौर ने संत शिरोमणि गीतार्थ तपस्वी की उपाधि से अलंकृत कििया



यहा पढे ⬇⬇⬇


दीपावली  2020 में कब है, जानिए लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजन विधि और कथा ⬇⬇

श्रमणोपाशक श्रावक Quiz

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Topic -::-  श्रमणोपाशक श्रावक🙏



श्रावक ---श्रद्धा करे जिनवचन पर🙇🏻‍♂️

श्रावक --- चले नेक रस्ते पर🙇‍♂️

श्रावक ---इच्छा करे चारित्र की🙇🏻‍♂️


*ऐसे अनेक गुण श्रावक के है जिसे हमे पहचानना है*🙇🏻‍♂️🙏🙇‍♂️


💠1️⃣  *श्रावक देता है?*

🅰️ *सुपात्रदान*


💠2️⃣ *श्रावक लेता है?*

🅰️ *प्रभु नाम*


💠3️⃣ *श्रावक धारण करता है?*

🅰️ *समकित*


💠4️⃣ *श्रावक देखता है?*

🅰️ *दूसरों के गुण*


💠5️⃣ *श्रावक रहता है?*

🅰️ *लोक मे*


💠6️⃣ *श्रावक  संग करता है?*

🅰️ *सज्जन का*


💠7️⃣ *श्रावक छोडता है?*

🅰️ *कुटेव,, मिथ्यात्व*


💠8️⃣ *श्रावक बिछाता है चद्दर?*

🅰️ *कुटेव,, मिथ्यात्व*


💠8️⃣ *श्रावक बिछाता है चद्दर?*

🅰️ *पुण्य की*


💠9️⃣ *श्रावक जानता है मार्ग?*

🅰️ *वीतराग मार्ग*


💠🔟 *श्रावक मांगता है?*

🅰️ *आरोग्य बोहिलाभं*

*आरोग्य और बोधिलाभ*


💠1️⃣1️⃣ *श्रावक भोजन करता है?*

🅰️ *ज्ञानामृत*


💠1️⃣2️⃣ *श्रावक चलता है?*

🅰️ *जतनापूर्वक*


💠1️⃣2️⃣ *श्रावक बोलता है वाणी?*

🅰️ *हितकारी*


💠1️⃣3️⃣ *श्रावक का आभूषण?*

🅰️ *शील*


💠1️⃣4️⃣ *श्रावक निंदा करे?*

🅰️ *स्व आत्मा की*


💠1️⃣5️⃣ *श्रावक डरता है?*

🅰️ *पापकर्म से*


💠1️⃣6️⃣ *श्रावक तोलता है?*

🅰️ *न्याय*


💠1️⃣7️⃣ *श्रावक किसके सामने झुकता है?*

🅰️ *सुदेव--सुगुरु--सुधर्म*


💠1️⃣8️⃣ *श्रावक जतनापूर्वक कहाँ चलता है?*

🅰️ *धर्म मार्ग पर*


💠1️⃣9️⃣ *श्रावक धोता है?*

🅰️ *आत्मा का मेल*


💠2️⃣0️⃣ *श्रावक स्नान करता है?*

🅰️ *ज्ञान गंगा मे*

💠2️⃣1️⃣ *श्रावक जीवन मे ग्रहण करता है?*

🅰️ *12 व्रत*


💠2️⃣2️⃣ *श्रावक ठोकर मारता है?*

🅰️ *अनिति के धन को*


💠2️⃣3️⃣ *श्रावक जगता है?*

🅰️ *ब्रह्म मुहूर्त मे*


💠2️⃣4️⃣ *श्रावक लीन रहता है?*

🅰️ *स्वाध्याय मे*

           

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दीवाली स्पेशल Quiz


1️⃣ दीपावली के दिन कौन से तीर्थंकर का कौन सा कल्याणक है❓

💡 महावीरस्वामीजी - निर्वाण कल्याणक


2️⃣ जैन लोग दीपावली अमावस्या को  क्यों मनाते है।

🪔प्रभु मोक्ष चतुर्दशी के अंतिम प्रहर  हुआ।


3️⃣ जिसका न आरंभ है न अंत है।इसका प्रतीक स्वरूप मंदिर 

में क्या चढ़ाते हैं

🕯️लड्डू


4️⃣ दीवाली के महीने का नाम 

और-देव गुरु  धर्म  के वफादारी के लिए व्रती कौन बने?

📝जवाब -कार्तिक सेठ 


5️⃣ दीपक राग  किसने गाया था

🅰️ तानसेन ने


6️⃣ दीप महोत्सव सबसे पहले कहाँ हुआ❓

💡18) पावापुरी/अपापापुरी


7️⃣ दीपावली के दिन किसका राज्याभिषेक हुआ❓

💡 पालक राजकुमार


8️⃣ दीपावली के दिन  राजा की मृत्यु हुई और मृत्यु भी दिवाली को हुई❓

💡चन्द्र प्रद्योतन राजा


9️⃣ सामयिक की दीवाली किसने की

🪔 पुनिया श्रावक जी


२8धनतेरस को कौन अरिहंत बने?

📝जवाब -लक्षमीसेठ    


1️⃣1️⃣ चारित्र की दिपावली किसने की❓

💡पुण्डरीक 


1️⃣2️⃣ दिवाली  का दूसरा नाम

🕯️निर्वाण दिवस


1️⃣3️⃣ भाव दीपक बूझने से द्रव्य दीपककिसने जलाया

🪔राजाओ ने औऱ देवों ने


1️⃣4️⃣ देवताओं ने किस चीज के बने दीप जलाए

🪔रत्नों से

1️⃣5️⃣ दीवाली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ला एकम को क्या मनाया जाता है

🕯️वह दिन नव वर्ष के रूप मेंमनाया जाता हैं


1️⃣6️⃣ भाई बीज कब से मनाई जाती है

🕯️सुदर्शना जी दुखी नंदी वर्धन जी को घर ले गई तब से


1️⃣7️⃣ पटाखों से सबसे ज्यादाकिस की हिंसा होती है।

💡वायु काय के जीवों की


1️⃣8️⃣ पावा पूरी में जो,निर्वाण चरण है ,उसे किसने उत्कीर्ण किये

🕯️सौधर्मेन्द्र जी ने


1️⃣9️⃣ दिवाली वाले दिन मोक्ष जाने से पहले आधी रात को आखिरी बार उपदेश दिया था जिसे 'किस सूत्र' के नाम से जाना जाता है।

📕उत्तराध्ययन सूत्र' के नाम से जाना जाता है।


2️⃣0️⃣ वीरनिर्वाण संवत्सर की शुरुआत कब से हुई

🅰️ जब कार्तिक शुक्ल एकम से नये संवत्सर की शुरूआत हुई थी,


2️⃣1️⃣ केवलज्ञान रूपी प्रकाश आत्मा में प्रकट हो ऐसी भावना से कौन सी पूजा की जाती

💡 दीपक पूजा


2️⃣2️⃣ दीपावली पर्व   खाता बही , रोकड़ बही  आदि जो कुछ बनाते हैं उसमें बुद्धि किसके जैसी होनी चाहिए लिखा जाता है ?

🅰️ अभयकुमार जी जैसी बुद्धि



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