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लक्ष्य निर्धारित कर सम्यकत्व के लिए पुरुषार्थ करेंगे तो मोक्ष का मार्ग मिलेगा- पूज्य श्री अतिशयमुनिजी म.सा.

लक्ष्य निर्धारित कर सम्यकत्व के लिए पुरुषार्थ करेंगे तो मोक्ष का मार्ग मिलेगा- पूज्य श्री अतिशयमुनिजी म.सा. 

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सुदीर्धजीवी शासनश्री संयमज्येष्ठा साध्वीश्री बिदामां जी एक परिचय

 🎌 सुदीर्धजीवी शासनश्री संयमज्येष्ठा साध्वीश्री बिदामां जी एक परिचय :-



🔸 जन्म - विक्रम संवत 1975 कार्तिक कृष्णा 04 

🔹 जन्म स्थान - सरेवड़ी (मेवाड़)

🔸 पिता का नाम - वृद्धि चन्द जी चावत

🔹 माता का नाम - हजां बाई चावत

🏮 शादी -पिंपली निवासी हेमराज जी दक के साथ हुई शादी के 06 महीने बाद हेमराज जी की मृत्यु हो गई।


⚜🔺 दीक्षा - विक्रम संवत 1998 कार्तिक कृष्णा 09 आचार्य श्री तुलसी के कर कमलों से। 


⚜🔺 शासनश्री अलंकरण- विक्रम संवत 2069 भाद्रपद शुक्ला 09 आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा।


👁‍🗨 विशेष -

🎴 शासनश्री जी 04 नवम्बर 2020 को 103 वें वर्ष में प्रवेश कर रही है जो की तेरापन्थ धर्म संघ के 261 वर्ष के इतिहास में एक रिकार्ड बनने जा रहा है। ऐसा इतिहास बताता है की आचार्य भिक्षु से आचार्य महाश्रमण जी के बरतारे में 103 वां वर्ष इनको ही आ रहा है......।।

🎖संयम पर्याय से वर्तमान में धर्म संघ में संयम जयेष्ठा है।

🎖 चार आचार्यों की सेवा की है।

🎖आठ आचार्यों द्वारा दीक्षित साधु साध्वियों को देखा है।

🎖 शासनश्री जी आज भी महीने में 5 उपवास करते है।

🎖 साध्वी चर्या में पूर्ण सजग है आज भी मंगल पाठ सुनाते है और बैठे-बैठे पात्री आदि कार्य करते है।


🎖 अभी शासनश्री जी कालू (बिकानेर) में साध्वीश्री उज्जवलरेखा जी के साथ विराज रहे है।


📍 नोट - शासनश्री साध्वी श्री बिदामां जी ने गृहस्थ अवस्था मे आचार्य श्री कालूगणी के दर्शन किये थे, उस दृष्टि से चार आचार्य की सेवा समझे। साधु जीवन मे तीन आचार्यो की सेवा।


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