श्रावक के १४ नियम जो हमें रोज़ लेने चाहिये
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श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन तीर्थ, पाटन (गुजरात) Shankheshwar Parshwanath
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UNIVERSAL UNANSWERED QUESTIONS ELEVEN DOUBTS: MAHAVIR SWAMI IN DEEP MEDITATION (kewal gyan)
UNIVERSAL UNANSWERED QUESTIONS DOUBTS OF EACH HUMAN LIFE PERSON ?
WHAT IS LIFE ?
WHO AM I ?
LIFE AFTER DEATH?
WHY IS MY EXISTENCE?
WHERE IS SOUL ?
WHERE IS ATMA?
WHY CANT I SEE ATMA ?
KARMA ?
REBIRTH?
GREATEST MYSTERIES OF HUMANS: SCIENCE: THE ELEVEN DOUBTS: Tirthankar Bhagwan MAHAVIR SWAMI IN DEEP MEDITATION:
JAINISM: JAIN RELIGION:
चिन्तन-कण : उमेश मुनि द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Chintan Kan : by Aacharya Umesh Muni ji maharaj Hindi PDF Book
चिन्तन-कण : उमेश मुनि द्वारा हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक |
Chintan Kan : by Aacharya Umesh Muni ji maharaj Hindi PDF Book
कर्मो को समभाव पूर्वक सहन करना सीख लिया तो बार बार के जन्म मरण से उसका छुटकारा मिल जाता है ~ प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनिजी म.सा
व्यक्ति हंस हंस कर कर्म तो कर लेता है।परन्तु जब किये हुवे कर्म उसके उदय में आते है तो,उन्हें सहन नही कर पाता है।व्यक्ति द्वारा किये गए कर्मो को समभाव पूर्वक सहन करना सीख लिया तो बार बार के जन्म मरण से उसका छुटकारा मिल जाता है।जीवन मे व्यक्तियों को सरलता,समभाव और क्षमा शीलता लाना चाहिए।
उक्त उदगार , जिनशासन गौरव,आचार्य श्री उमेशमुनि जी म.सा.के सुशिष्य प्रवर्तक श्री जिनेन्द्र मुनि जी म.सा. ने जैन स्थानक,लिमडी में धर्मसभा को संबोधित करते हुवे व्यक्त किये।
आपने आगे कहा कि,आज का व्यक्ति सहनशीलता नही रखने से कई परेशानियों को अपने सामने खड़ा करता हुआ कहता है कि,अब कब तक हम सहन करते रहेंगे।वीतराग परमात्मा अपनी देशना में फरमाते है कि,मानव जीवन मे जो यहां सहन करना सीख लेता है,उनका समाधन होकर सहन करने की कला से वह कर्मो की निर्जरा की करके अपने-अपने मन मे शुद्ध भावों का समावेश कर लेता है।व्यक्तियों को अपने मन मे कभी बुरे भाव और आर्द्ध ध्यान नही करना चाहिए।
इस मानव जीवन में समभाव और संयम को धारण कर आत्मा को परमात्मा की और अग्रसर करने का आव्हान किया। आपने आगे कहा कि,वह सुख भी किस काम का जिसमे हमारी कषायो से मुक्ति नही मिले।कषाय को हमे त्यागकर संयम जीवन धारण कर अपना उत्थान करना चाहिए।
धर्मसभा को पूज्य रवि मुनि जी म.सा.ने सम्बोधित करते हुवे कहा कि,गुरु के बताए हुवे मार्ग पर चलकर उन पर सच्ची श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी दुःखी हो ही नही सकता है।इस अवसर बड़ावदा संघ की और से देवेन्द्र साँड ने बड़ावदा में शेखे काल विराजने की विनती की।
तपस्या के क्रम में तृप्ति बम्ब ने ग्यारह उपवास, राजेन्द्र दुग्गड़ ने दस उपवास ,आयुषीबेन कर्णावट और निविदाबेन कर्णावट , सपनाबेन कर्णावट के नो- नो उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान हुवे।धर्मसभा का संचालन बाबूलाल कर्णावट ने किया। प्रभावना का लाभ महेन्द्र जीकर्णावट, प्रीतिसुधाजी साँड, दिनेशजी चोपड़ा,नेहा धवल कुमार इत्यादि द्वारा लिया गया।
चोवीसी गायन:- तपस्वी आयुषी सन्नी कर्णावट , निविदा आयुष कर्णावट के केवल गर्मजल के आधार पर नो-नो उपवास की तपस्या पूर्ण करने पर बस स्टैंड स्थित कर्णावट निवास स्थल पर संध्या में चोवीसी गायन का सुंदर आयोजन कर तपस्या की अनुमोदना करते हुवे दोनों तपस्वियों का बहुमान किया।बाद में सुशीलाबेन एच कर्णावट औऱ शौक़ीनमल जी नपावलिया द्वारा प्रभावना वितरण की गई।
सुपात्र दान (गोचरी) देने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना आवशयक है
सुपात्र दान GOCHARI गोचरी
🔺साधू-साध्वी जो अपने जीवन निर्वाह के लिए शुद्ध आहार--पानी ग्रहण करते है, उसे गोचरी कहते है। पंच महाव्रतधारी साधु-साध्वियों को श्रावक निर्दोष आहार--पानी बहरावें, उसे सुपात्र दान कहते है। सुपात्र दान देने से कर्मो की महान् निर्जरा होती है!
सुपात्र दान देने के लिये निम्न बातों का ध्यान रखना आवशयक है---
🔸असूझता व्यक्ति दरवाजा ना खोले यानि कच्चा पानी, हरी सब्जी या Electronics घड़ी,
मोबाइल आदि से संयुक्त हो, तो दरवाजा नहीं खोलना, बहराने के लिए भी आगे नहीं आना। घंटी नहीं बजाना, फूँक नहीं मारना, चुटकी-ताली नहीं बजाना।
🔸सात--आठ कदम सामने लेने जावे। सिर झुकाकर "मत्थेएण
वंदामि" बोले ।
🔸महाराज साहब को देखकर लाईट--पंखा, टी.वी. आदि को ऑन-ऑफ न करें, जैसे है वैसे ही रहने देवें ।
🔸कच्चा पानी, हरी वनस्पति, ऊग सके ऐसे बीज जैसे राई, सरसों, धनिया, कच्चा जीरा, कच्चा नमक आदि पदार्थो को तथा कच्चा सलाद, अंकुरित धान्य, फ्रिज, अग्नि से स्पर्श किये हुए पदार्थो को बहराने के लिये नहीं उठाएँ ।
🔸आहार-पानी के बाद औषध- भेषज, वस्त्र, पात्र अन्य कोई सेवाकार्य हो, तो पूछें। स्थानक में, धर्मस्थान में, गोचरी के लिए मेरे घर चलो ऐसा न कहें।
🔸अहो भाव पूर्वक बहरायें, मन में प्रसन्नता के भाव रखें तथा बोलें बड़ी कुपा की, बारम्बार हमें सेवा का मौका प्रदान करें। पदार्थ शुद्धि, पात्र शुद्धि और पश्चात् शुद्धि का ध्यान रखना विवेक है ।
🔸आस-पास के घर बतावें एवं गली तक पहुँचाने जावें! बहराते हुए अन्नादि से हाथ भर जाये, तो कच्चे पानी से नहीं धोना!
🔸गोचरी की यतना रखना या बैठकर बहराना!
🔸आहार पानी बहराते हुए घुटने के ऊपर से गिर जावे तो घर असुझता हो जाता है।
🔸निर्दोष आहार पानी बहराना चाहिए! साधु--साध्वियों के निमित्त आहार-पानी नहीं बनाना चाहिए।
🔸ऋषभदेव व महावीर ने पूर्वभवों में सुपात्र दान देकर धर्म का मूल समकित प्राप्त किया एवं कालांतर में तीर्थंकर बने।
🔸नेम--राजुल ने पूर्वभव में प्रासुक जल संतों को बहराया एवं महान् लाभ तीर्थंकर गौत्र बंध को प्राप्त किया!
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