जैन दिक्षा / संयम पर बनाई हुई हिंदी कविता

 

जैन दिक्षा / संयम पर बनाई हुई हिंदी कविता

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1.Poem on Diksha in Hindi

दीप प्रज्ज्वलित हुए, हुआ नया सवेरा है
पारख कुल का प्रांगण रोशनी से हुआ उजियारा है
झिलमिल सितारे सारे करते आपको वंदन है
वीर माताजी पिताजी को हमारा सत सत अभिन्नन्दन है
निर्मल विचारों के अनुरूप खुशियों से खिलता आंगण है
आपकी ही प्रतिरुप से सज रहा जिनशासन का प्रांगण है
देते दुआ हम सब, कर रहे हम वंदन
वीर पथ पर चलने वाली बहना को ढेरो शुभकामनाएं है।

2.दीक्षा पर कविता

चित्रण क्या करूँ उसका जिसका जीवन खुद एक विश्लेषण है
लाखो की भीड़ में बनी आज वो पथ प्रदशक है
संयम रूपी आभूषण से जिसने अपनी मांग को सजाया है
वीर पथ पर चल पड़ी आज वो बहन सपना है।

पारख परिवार का सौभाग्य, चमका आज एक सितारा है
जिनशासन की बगिया को तप, त्याग से सजाना है
छोड़ के रिश्तों के बंधन, चल पड़ी काँटो की पगडंडी पे
अपनी ही उर की सौरभ से जिनशासन को महकाना है।

पूज्य दादा श्री जुगराज जी मरासा ने जब संयम को अपनाया
तब से चार विगय का सम्पूर्ण त्याग किया
नीरस आहार और उच्च विचार से प्रज्जवलित हुए
संयम से रमन कर अहिंसा का चहु और प्रकाश किया।

गूंज गूंज कर आसमा दे रहा आवाज़ है
इस घर की बेटियां विदा हो रही हर आँख में भरा दर्द है
माँ बाप की दुलारी आज हो गयी वो परायी
संयम रूपी रत्न से सुसज्जित नए जन्म का आज अभिषेक हुआ।

दीक्षा के इस पावन अवसर पर करते दीक्षार्थी बहन का अभिन्नन्दन
अपनी प्यारी सी बहन को करते गुरुवर को समर्पण
तप और त्याग की अखंड ज्योत से हो आपका संगम
मोक्ष की सीढ़ियों को छू कर्मो से आपका विसर्जन।

3. Jain Diksha poem Sanyam pe Kavita

कमल के समान सुवासित जिसका जीवन है
प्यार से सजा जिसके आत्मा का दर्पण है
मुश्किलों में रहा सदा जिसका संगम है
माँ के जीवनकाल का करते आज हम चित्रण है।

जीवन जिसका त्यागमय, करुणा की प्याली है
सबकी चहेती हमारी प्यारी नानी है
धीर,वीर,गंभीर और गुणों से परिपूर्ण
ममता से युक्त महिमा उनकी न्यारी है।

मथानिया की पावन धरा, फौलाद है वीरो की
संयम रूपी आभूषण कीमत है आज रत्नों की
युगांत तक याद रहेगी यह वो रवानी है
महावीर के शाशन की यह अद्भत कहानी है।

पूज्य कलेजी की कोर साक्षी जी मरासा ने जब संयम को अपनाया
तब से वैराग्य इनके अंतर मन मे समाया
उपवास, चोइवार है जिनके सूत्रधार
समस्त जैन समाज की बनी आज वो पहचान।

कैसे दे विदाई आपको आंखे भर भर आती है
जन जन के मन मे एक कृति उभर आती है
सूना हुआ नाँहियाल अब नानी कहकर किसे बुलायेंगे
आपसे जुड़ा होकर कैसे हम अब रह पायेंगे।

दीक्षा के इस पावन अवसर पर करते हम आपका अभिन्नन्दन
अपनी प्यारी सी नानी को करते गुरुवर को समर्पण
तप, त्याग, की अखंड ज्योत से हो आपका संगम
मोक्ष की सीढ़ियों को छू हो कर्मो से आपका विसर्जन।

4. Heart Touching Poem on Jain Diksha

मार्ग है दुश्वार, खांडे की धार है
संभल संभल के कदम बढ़ाना, पग पग पर शूल है
ऊपर तपता सूरज, नीचे धड़कते अंगारे है
विचलित न होना तुम, क्षमाभाव तुम अपनाना
है पारख कुल की सपना, तुझे देते आशीष हज़ार
पथ के कांटे सारे फूल बने यही हमारी शुभकामनायें है
विघ्न हज़ार आयेंगे, तुम कभी न घबराना
है मोक्ष मार्ग की साधिका तुझे सत सत नमस्कार है।

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