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लक्ष्य निर्धारित कर सम्यकत्व के लिए पुरुषार्थ करेंगे तो मोक्ष का मार्ग मिलेगा- पूज्य श्री अतिशयमुनिजी म.सा.

लक्ष्य निर्धारित कर सम्यकत्व के लिए पुरुषार्थ करेंगे तो मोक्ष का मार्ग मिलेगा- पूज्य श्री अतिशयमुनिजी म.सा. 

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पूज्य गुरुदेव श्री चैतन्य मुनि जी महाराज साहब के देवलोकगमन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि ~महाअभिग्रहधारी श्री राजेशमुनिजी मा सा

 श्रमण संघीय सलाहकार परम पूज्य गुरुदेव श्री चैतन्य मुनि जी महाराज साहब के देवलोकगमन पर 

भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🏻


पूज्य गुरुदेव महाअभिग्रहधारी श्री राजेशमुनिजी मा सा द्वारा ( इंदौर )



पूज्य श्री चैतन्य मुनि जी महाराज साहब सक्रिय दयावान लोकप्रिय और कर्मठ संत थे थे उन्होंने पूज्य श्री विनय मुनि जी महाराज साहब के पास दीक्षित होकर पूज्य आचार्य भगवान श्री उमेश मुनि जी महाराज की 28 वर्ष तक सेवा की हर गांव में प्रवेश पर विदाई पर स्वामी वात्सल्य करवा करवा कर आचार्य भगवंत की महिमा में मई माह में चार चांद लगाए 

आचार्य भगवंत की कई प्रकार की पुस्तकों का प्रकाशन उनके द्वारा करवाया गया यह सभी मैं समन्वय बनाकर अपना कार्य करते थे आचार्य भगवान उमेश गुरुदेव के जाने के बाद प्रवर्तक श्री जिनेंद्र मुनि जी महाराज साहब को प्रवर्तक पद से अलंकरण मुनि के द्वारा किया गया

अपने अंतिम समय में उन्होंने इंदौर में एक भवन की कल्पना साकार की वे नागदा के बाफना परिवार के बादशाह थे संयोग की बात जिस गांव में जन्मे उसी गांव में उनका अंतिम चातुर्मास सानंद संपन्न हुआ कुछ दिन पूर्व अभी ग्रह धारी श्री राजेश जी महाराज साहब ने उनके दर्शन किए उन्होंने आओ इंदौर के बादशाहा से संबोधित किया 

श्री राजेंद्र मुनि जी महाराज साहब दीक्षा पूर्व श्रीकांनमुनि जी महाराज साहब द्वारा कहां गया की आप मस्तक का लोचकरके के दिखाओ स्वयं आचार्य भगवान श्री उमेश मुनि जी महाराज साहब ने जामनेर के सुपारी बाग में वैराग्य काल में ही श्री राजेंद्र मुनि का लोच प्रारंभ करके उनका समापन श्री चैतन्य जी द्वारा किया

 उन्होंने जीवन में कईयों को दीक्षा के लिए प्रेरित किया दिशाएं भी दी कल रामनवमी थी और उन्होंने अपने जीवन को अंतिम रूप दिया श्री चैतन्य मुनि जी महाराज साहब जैसे नीराभिमानी सेवा भावी संतों पर समाज को गर्व होना चाहिए जिन्होंने समय-समय पर डूबती हुई संप्रदाय की समाज की संघ की नाव को सहारा दिया उनके यश नाम कर्म था खूब यस कमाया और अपनों ने पराया समझा और परायो ने अपना समझा पराया समझने वालों को भी जब भी जरूरत पड़ी उन्होंने उन्हें अपना लिया उनका सहयोग किया अनेकों ऐसे प्रसंग है जो अभी ग्रह धारी श्री राजेश मुनि जी महाराज साहब ने देखे हैं सुने हैं सारांश यह है की एक अच्छे अनुभवी संत को समाज ने खो दिया है

उनकी अनेको खूबियों को समाज ग्रहण कर सकता था पर जिसमें जितनी काबिलियत थी उतनी ले ली चारों तरफ से अपमानित होने के बाद भी उन्हीं लोगों के बीच में रहकर कैसे जिया जाता है यह उच्च कोटि का मार्गदर्शन उनके जीवन से सहज प्राप्त होता है बहुत कुछ सहना पड़ा पर हिम्मत नहीं हारी 

डायबिटीज होने के बाद भी बीमार होने के बाद भी विहार करना आम जनता को सुबह से लेकर शाम तक सुनाना बहुत लंबा लंबा बोल कर के सुनाते थे खिल्ली उड़ाने वाले खिल्ली उड़ाते थे सुनने वाले सुनते थे लंबा वही तो सुना सकता है जिसके पास ज्ञान होगा अजैन लोगों को जैन धर्म से जोड़ना उनके लिए आसान काम था अनेक मौकों पर संघ को सहारा दिया बिना किसी भेदभाव के

आज हमारे बीच में श्री चैतन्य जी महाराज सा नहीं रहे पर उन्होंने अकेले रहकर भी संयम पना बरकरार रखा कम ज्यादा दोस् सभी को लगते हैं पंचम काल सभी के शरीर समान नहीं होते कितने पुण्य का काम उनकी पार्थिव शरीर की अंतिम क्रिया अति शीघ्र हो गई श्री सुभाष जी विनायका श्री दिलीप जी विनायका श्री कमल जी विनायका श्री अनिल जी बराडिया आदि ने अंतिम समय में बहुत सेवा की अभीग्रह धारी श्री राजेश मुनि जी श्री राजेंद्र मुनि जी ने श्रद्धा सुमन रूप जो फरमाया वह आप पढ़ रहे हैं

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