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पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म. सा. ज्ञान और संस्कार के भंडार थे-साध्वी श्री मुक्तिप्रभाजी

पेटलावद

गुरुदेव उमेशमुनिजी म.सा ज्ञान और संस्कार के भंडार थे-

प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी मसा की आज्ञानुवर्ति साध्वी श्री मुक्तिप्रभाजी ठाणा पांच की निश्राय में श्री संघ पेटलावद ने शीतला सप्तमी से लेकर चैत्र विधि ग्यारस तक चार दिवसीय धार्मिक आयोजन किये गये। जिसमें शीतला सप्तमी के दिन प्रवर्तक जिनेंद्रमुनिजी मसा का जन्म दिवस मनाया गया एवं चैत्र विदि ग्यारस के दिन आचार्य भगवन उमेशमुनिजी म.सा अणु की नवीं पुण्यतिथि मनाई गई। आयोजनों में एकाशने का तेला, सामायिक का तेला, सामूहिक उपवास, नवकार मंत्र के जाप, अणु चालीसा का पाठ, स्तवन और गुणानुवाद सभाएं आयोजित की गई। साथ ही अखिल भारतीय चंदना श्राविका संगठन के द्वारा आचार्य उमेशमुनिजी द्वारा रचित जिज्ञासा की तरंगें पुस्तक पर आधारिक ओपन परीक्षा का आयोजन किया गया। जिसमें १९ प्रतिभागीयों ने भाग लिया। इस अवसर पर आचार्य रामलालजी मसा की आज्ञानुवर्ति साध्वी श्री जयश्रीजी मसा ठाणा आठ का भी दो दिवसीय लाभ मिला। साध्वी श्री मुक्तिप्रभाजी ने आचार्य भगवन उमेशमुनिजी मसा का स्मरण करते हुए कहा वे ऐसे माली थे जिनके गुलदस्ते में हर फूल महक से परिपूर्ण था। यह निर्णय लेना कठिन हैं कि किस फूल से माला का गूंथन करे। वे ज्ञान और धर्म की सुवास से सदा वासित रहते थे। संकल्प के धनी थे। जो आध्यात्मिक, धार्मिक संकल्प धार लेते थे। उसे अवश्य पूरा करते थे। जो तप कर रोंध कर, मार सहकर सुघट बनता हैं वो ही कलश सर पर धरा जाता हैं। जैसे की मिट्टी को रोंधा जाता हैं पीट-पीटकर तराशा जाता हैं और तपाकर घडे के रूप में बनाया जाता हैं। तभी वह शीतल जल देता हैं। वैसे ही गुरूदेव थे। साध्वीश्री ने आगे कहा गुरूदेव मृत्यु पश्चात अपना कोई चिन्ह या कोई समाधि नही चाहते थे। यही कारण हैं कि न तो उनकी समाधी बनाई गई और न ही कोई स्थान स्थाई रूप से निर्माण किया गया। लब्धियों और पूर्वाभास के पूर्ण ज्ञाता होने के बावजूद उन्होने कभी इसका प्रदर्शन नही किया। पर साधु साध्वियों के साथ गुरूदेव के सत्संग में व संयोगों से अकल्पनिय घटा हैं वो आज भी स्तरणीय हैं। प्रवर्तकश्री जिनेंद्र मुनिजी म.सा के बारे में आपने कहा आप कुशल शिल्पकार हैं जो श्रावक श्राविकाओं का, साधु-साध्वियों को आदर्श शिल्प के रूप में घड देते हैं। वे आदर्श चिकित्सक हैं जो मन की वादियों को दूर हटा देते हैं। 

वे कुशल वकील हैं जो दोनों पक्षो को मिला देते हैं। वे कुशल इंजीनियर हैं जो अद्भूत चरित्र निर्माण कर देते हैं। साध्वीश्री कुसुमलताजी ने स्तवन के माध्यम से, साध्वी प्रेमलताजी ने उनके चमत्कारिक वकतव्य के बारे में, साध्वी नित्यप्रभाजी ने गुरूदेव के आध्यात्मिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी।


श्री संघ उपाध्यक्ष सोहनलाल चाणोदिया, सचिव नीरज जैन, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र कटकानी, प्रवक्ता जितेंद्र मेहता ने शब्दों के माध्यम से, निराली भंडारी, मंजू भंडारी, दिपांशी व सिद्धी जैन ने गीतीका के माध्यम से अपने उद्गार व्यक्त किये। श्री संघ कोषाध्यक्ष अशोक मेहता, श्रावक अजय अमृतलाल मेहता व एक गुप्त अणु भक्त के द्वारा प्रभावना का वितरण किया गया। चार दिवसीय आयोजन में अध्यक्ष नरेंद्र मोदी, अनोखीलाल मेहता, चंदनमल चाणोदिया, मणीलाल मेहता, अनूप मेहता, हस्तीमल बाफना, सुरेश सोलंकी, कांतिलाल झाडमता, ज्ञानमल भंडारी, जयंतीलाल मेहता, चंदना श्राविका संघ की उपाध्यक्ष मधु मेहता, सखी झाडमता, चंचला झाडमता, अल्पना पटवा, किरण कटकानी, खुश्बू मेहता आदि कई श्रावक श्राविकाओ ने उपस्थित होकर आयोजन की शोभा बढाई। संचालन राजेंद्र कटकानी ने किया।

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