मङ्गलम् class 9 sanskrit shemushi

 

मङ्गलम्

प्रथमः पाठः भारतीवसन्तगीतिः

प्रथमः पाठः भारतीवसन्तगीतिः   

द्वितीयः पाठः स्वर्णकाकः

 द्वितीयः पाठः स्वर्णकाकः

तृतीयः पाठः गोदोहदम् (भाग -1) (भाग -2)

तृतीयः पाठः 'गोदोहनम्

चतुर्थ पाठः 'सूक्तिमौक्तिकम्' (9th संस्कृत)

पाठः परिचयः (पाठ का परिचय)


प्रस्तुतोऽयं पाठः नैतिकशिक्षाणां प्रदायकरूपेण वर्तते। अस्मिन् पाठांशे विविधग्रन्थेभ्यः सङ्ग्रहणं कृत्वा नानानैतिकशिक्षाबोधकपद्यानि गृहीतानि सन्ति। अत्र सदाचरणस्य महिमा, प्रियवाण्याः आवश्यकता, परोपकारिणां स्वभावः, गुणार्जनस्य प्रेरणा, मित्रतायाः स्वरूपम्, श्रेष्ठसङ्गतेः प्रशंसा तथा च सत्सङ्गतेः प्रभावः इत्यादीनां विषयाणां निरूपणम् अस्ति। संस्कृतसाहित्ये नीतिग्रन्थानां समृद्धा परम्परा दृश्यते। तत्र प्रतिपादितशिक्षाणाम् अनुगमनं कृत्वा जीवनसाफल्यं कर्तुं शक्नुमः।

हिन्दी अनुवाद ― यह प्रस्तुत पाठ नैतिक शिक्षाओं को प्रदान करने वाला है। इस पाठ के अंश में विभिन्न ग्रन्थों से संग्रहण करके अनेक नैतिक शिक्षाओं का बोध कराने वाले पद्य लिए गए हैं। इसमें सदाचार की महिमा, प्रियवाणी की आवश्यकता, परोपकारियों का स्वभाव, गुणार्जन की प्रेरणा, मित्रता का स्वरूप, श्रेष्ठ संगति की प्रशंसा और सत्संगति का प्रभाव इत्यादि विषयों का निरूपण है। संस्कृत साहित्य में नीतिग्रन्थों की परम्परा दिखाई देती है। इनमें बताई गई शिक्षाओं का अनुसरण करके जीवन को सफल कर सकते हैं।

पाठ का हिन्दी अनुवाद एवं भावार्थ

[1] वृत्तं यत्नेन संरक्षेद् वित्तमेति च याति च।
अक्षीणो वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः॥ [मनुस्मृतिः]
अन्वयः ― वृत्तं यत्येन संरक्षेद् वित्तम् एति च याति च। वित्ततः क्षीणः अक्षीणः भवति वृत्ततः (क्षीण) तु हतः हतः।
भावार्थ ― मनुष्य को अपने चरित्र (आचरण) की प्रयत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए। धन तो आता-जाता रहता है। धन के नष्ट हो जाने पर मनुष्य क्षीण नहीं होता अर्थात् उसका चरित्र सुरक्षित रहता है लेकिन चरित्र के नष्ट होने पर सब कुछ नष्ट हो जाता है।

[2] श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्।
आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥ [विदुरनीतिः]
अन्वयः ― धर्मसर्वस्वं श्रूयतां श्रुत्वा च एव अवधार्यताम्। आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।
भावार्थ ― धर्म (कर्तव्य पालन का ज्ञान) का सार क्या है, सुनो। और सुनकर इसका अनुगमन (धारण) करना चाहिए। स्वयं को जो अच्छा न लगे वह व्यवहार दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।

[3] प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्माद् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥ [चाणक्यनीतिः]
अन्वयः ― सर्वे जन्तवः प्रियवाक्यप्रदानेन तुष्यन्ति। तस्माद् तत् एव वक्तव्यं वचने दरिद्रता का?
भावार्थ ― सभी प्राणी मीठी वाणी बोलने से प्रसन्न (सन्तुष्ट) होते हैं। इसलिए वही (मीठी वाणी) बोलनी चाहिए, बोलने में कैसी कंजूसी? अर्थात् मीठी वाणी में असीम शक्ति होती है। मीठी वाणी से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।

[4] पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः।
नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः परोपकाराय सतां विभूतयः॥
[सुभाषितरत्नभाण्डागारम्]
अन्वयः ― नद्यः स्वयम् एव अम्भः न पिबन्ति, वृक्षाः स्वयं फलानि न खादन्ति। वारिवाहाः खलु सस्यं न अदन्ति, सतां विभूतयः परोपकाराय (एव भवन्ति)।
भावार्थ ― नदियाँ स्वयं ही अपना पानी नहीं पीती हैं। वृक्ष स्वयं अपने फल नहीं खाते हैं। निश्चित हो बादल (अपनी) फसलों को नहीं खाते हैं। इसी प्रकार से सज्जनों की सम्पत्तियाँ परोपकार के लिए होती है। अर्थात् महान् लोगों की सम्पत्तियाँ, साधन और यहाँ तक कि जीवन भी परोपकार के लिए होता है।

[5] गुणेष्वेव हि कर्तव्यः प्रयत्नः पुरुषः सदा।
गुणयुक्तो दरिदोऽपि नेश्वरैरगुणैः समः॥ [मृच्छकटिकम्]
अन्वयः ― पुरुषैः सदा गुणेषु एव ही प्रयत्नः कर्त्तव्यः। गुणयुक्तः दरिद्रः अपि अगुणैः ईश्वरैः समः न (न भवति)।
भावार्थ ― मनुष्य को सदा गुणों को ही प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। गुणवान् व्यक्ति निर्धन होते हुए भी गुणों से हीन ऐश्वर्यशाली के समान नहीं हो सकता अर्थात् वह उससे कहीं अधिक श्रेष्ठ होता है।

[6] आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेण लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात्।
दिनस्य पूर्वार्द्धपरार्द्धभिना छायेव मैत्री खलसज्जनानाम्।।
[नीतिशतकम्]
अन्वयः ― आरम्भगुर्वी (भवति) क्रमेण क्षयिणी (भवति) पुरा लध्वी पश्चात् च वृद्धिमती (भवति) दिनस्य पूर्वार्द्धपरार्द्ध- छाया इव खलसज्जनानाम् मैत्री भिन्ना (भवति)।
भावार्थ ― आरम्भ में लम्बी (बड़ी) फिर धीरे-धीरे घटते (कम होते) स्वभाव वाली तथा पहले छोटी फिर बाद में लम्बी (बड़ी) होती हुई दिन के पूर्वाह्न और अपराह्न काल की छाया की तरह दुष्टों और सज्जनों की मित्रता भी अलग-अलग होती है।
अर्थात् जिस प्रकार दिन के पूर्वाह्न में छाया पहले बड़ी होती है और धीरे-धीरे छोटी होती चली जाती है। उसी प्रकार दुष्टों को मित्रता भी पहले ज्यादा और बाद में कम होती चली जाती है। इसके विपरीत अपराह्न की छाया जिस प्रकार पहले कम और धीरे-धीरे बढ़ती जाती है उसी प्रकार सज्जनों की मित्रता भी पहले कम और शनैः-शनैः प्रगाढ़ होती जाती है।

[7] यत्रापि कुत्रापि गता भवेयु- ईसा महीममण्डलमण्डनाय।
हानिस्तु तेषां हि सरोवराणां येषा मरालैः सह विप्रयोगः॥
[भामिनीविलासः]
अन्वयः ― हंसाः यत्र अपि कुत्र अपि महीमण्डलमण्डनाय गताः भवेयुः हानि तु तेषाम् सरोवरणाम् हि (भवति) येषां (सरोवराणाम्) मरासैः सह विप्रयोगः (भवति)।
भावार्थ ― हंस पृथ्वी को सुशोभित करने के लिए जहाँ कहीं भी चले जाएँगे (उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता)। पर हानि तो उन तालाबों की होती है जिनका हंसों के साथ वियोग होता है।
अर्थात् श्रेष्ठ, सज्जन कहीं भी रहें वे अपने गुणों से संसार को लाभान्वित ही करेंगे, पर वह जिस स्थान से चले जाएँगे वह स्थान निश्चित ही उनके लाभों से वंचित रह जाएगा।

[8] गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषाः।
आस्वाद्यतोयाः प्रवहन्ति नद्यः समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः॥
[हितोपदेशः]
अन्वयः ― गुणाः गुणज्ञेषु गुणाः भवन्ति, ते (गुणाः) निर्गुणं प्राप्य दोषाः भवन्ति। आस्वाद्यतोयाः नद्यः प्रवहन्ति ताः एव नद्यः समुद्रम् आसाद्य अपेयाः भवन्ति।
भावार्थ ― गुणों को जानने पहचानने वालों के लिए ही वास्तव में गुण, होते हैं, गुणहीनों के लिए तो वे दोष ही होते हैं। नदियाँ स्वादिष्ट जल के साथ बहती रहती हैं, पर समुद्र में मिलकर वह भी पीने योग्य नहीं रह जातीं।

शब्दार्थाः

वृत्तम् = चरित्र/आचरण [चरित्रम्/आचरणम्]।
यत्येन प्रयत्नपूर्वक [प्रयत्नपूर्वकम्]।
वित्तम् = धन [धनम्]।
एति = आता है [आगच्छति]।
याति = जाता है [गच्छति]।
अक्षीणः = नष्ट न हुआ/क्षीण नहीं होता [न क्षीणः सम्पन्नः]।
हतः हतः = सब-कुछ नष्ट हो जाता है [सर्वस्य हानिः]।
श्रूयताम् = सुनो [श्रवणं करोतु]।
धर्मसर्वस्वम् धर्म (कर्तव्य पालन का ज्ञान) का सार [धर्मस्य सारः]।
श्रुत्वा = सुनकर [श्रवणं कृत्वा]।
अवधार्यताम् = धारण/अनुगमन करना चाहिए [धारणं/अनुगमनम् कुर्यात्]।
आत्मनः = स्वयं के [स्वस्य]।
प्रतिकूलानि = जो अच्छा न लगे/अनुकूल नहीं [विपरीतानि]।
परेषाम् दूसरों के साथ [अन्येषाम्]।
समाचरेत् करना चाहिए [कुर्यात् ]।
प्रदानेन = बोलने से [उच्चारणेन]।
जन्तवः = प्राणी [प्राणिनः]।
तुष्यन्ति = प्रसन्न /सन्तुष्ट होते हैं [तोषम् अनुभवन्ति।
तस्माद् इसलिए [एतेन कारणेन]।
तदेव = वही [मधुरा वाणी]।
नद्यः = नदियाँ [सरितः]।
अम्भः = पानी [जलम्]।
खलु = निश्चित ही [निश्चयेन]।
वारिवाहाः = बादल [मेघाः]।
सस्यम् = फसल [अन्नम्]।
अदन्ति = खाते हैं [खादन्ति ]।
सताम् = सज्जन [सज्जनानाम्]।
विभूतयः = सम्पत्तियाँ [समृद्धयः]।
पुरुषैः = मनुष्य को [मनुष्यैः]।
कर्तव्यः = करना चाहिए [करणीयः]। 
एव = ही। 
दरिद्रः = निर्धन [धनरहितः]।
ईश्वरैः = समान [सदृशः ] ।
आरम्भगुर्वी = आरम्भ में लम्बी [आदौ दीर्घा]।
क्रमेण = धीरे-धीरे [क्रमशः]।
क्षयिणी = घटते स्वभाव वाली [क्षयशीला।
पुरा = पहले [पूर्वे]।
लघ्वी = छोटी [न्यूना]।
वृद्धिमती = लम्बी होती हुई [वृद्धिम् उपागता]।
पश्चात् = बाद में [अग्रे]।
पूर्वार्द्धपरार्द्धभिन्ना = पूर्वाह्न और अपराहन [ पूर्वार्द्धन परार्द्धन च]।
खलसज्जनानाम् = दुष्टों और सज्जनों की [दुर्जनसज्जनानाम्]।
यत्रापि = जहाँ भी।
कुत्रापि = कहीं भी।
महीमण्डलमण्डनाय = पृथ्वी को सुशोभित करने के लिए [ पृथिवीमण्डलाल‌ङ्करणाय]।
गताः भवेयुः = चले जाएँ [गच्छन्तु]।
तेषाम् = उनकी [तेषाम् सरोवराणाम्]।
मरालैः = हंसों से [हंसैः]।
विप्रयोगः = अलग होना [वियोगः]।
सह = साथ।
गुणज्ञेषु = गुणों को जानने-पहचानने वालों के लिए [गुणज्ञातषु जनेषु]।
निर्गुणम् = गुणहीन को [गुणरहितम्]।
आस्वाद्यतोयाः स्वादिष्ट (स्वादयुक्त) जल के साथ [स्वादनीयजलसम्पन्नाः]।
आसाद्य = पाकर/मिलकर [प्राप्य]।
अपेयाः = न पीने योग्य [न पेयाः/न पानयोग्याः]।

पाठ का अभ्यास (प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत―
(एक शब्द में उत्तर लिखिए।)
() वित्ततः क्षीणः कीदृशः भवति?
(धन से क्षीण कैसा होता है?)
उत्तर― अक्षीणः
(क्षीण नहीं)।

() कस्य प्रतिकूलानि कार्याणि परेषां न समाचरेत्?
(किसके प्रतिकूल कार्यों को दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए?)
उत्तर― आत्मनः
(स्वयं के)।

() कुत्र दरिद्रता न भवेत्?
(कहाँ दरिद्रता नहीं होनी चाहिए?)
उत्तर― वचने
(बोलने में)।
() वृक्षाः स्वयं कानि न खादन्ति?
(वृक्ष स्वयं क्या नहीं खाते हैं?)
उत्तर― फलानि
(फलों को)।

() पुरा का लघ्वी भवति?
(पहले क्या छोटी होती है?)
उत्तर― छाया
(छाया)।

प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत―
(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा के द्वारा लिखो।)
() यत्नेन किं रक्षेत् वित्तं वृत्तं वा?
(प्रयत्नपूर्वक किसकी रक्षा करनी चाहिए धन की या चरित्र की?)
उत्तर― यत्नेन वृत्तं रक्षेत्।

() अस्माभिः (किं न समाचरेत्)
कीदृशम् आचरणं न कर्त्तव्यम्?
(हमारे द्वारा (क्या नहीं करना चाहिए) कैसा आचरण नहीं करना चाहिए?)
उत्तर― अस्माभिः आत्मनः प्रतिकूलम् आचरणं परेषां न कर्तव्यम्।
(हमारे द्वारा स्वयं को जो अच्छा न लगे ऐसा व्यवहार दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।)

() जन्तवः केन तुष्यन्ति?
(प्राणी किस विधि से प्रसन्न होते हैं?)
उत्तर― जन्तवः प्रियवाक्यप्रदानेन तुष्यन्ति।
(प्राणी मीठी वाणी बोलने से प्रसन्न होते हैं।)

() सज्जनानां मैत्री कीदृशी भवति?
(सज्जनों की मित्रता कैसी होती है?)
उत्तर― सज्जनानां मैत्री पुरा लघ्वी वृद्धिमती च पश्चात् भवति।
(सज्जनों की मित्रता पहले छोटी और बाद में बढ़ने वाली होती है।)

() सरोवराणां हानिः कदा भवति?
(सरोवरों की हानि कब होती है?)
उत्तर― सरोवराणां हानिः मरालैः सह वियोगेन भवति।
(सरोवरों की हानि हंसों के साथ वियोग से होती है।)

प्रश्न 3. 'क' स्तम्भे विशेषणानि 'ख' स्तम्भे च विशेष्याणि दत्तानि तानि यथोचितं योजयत―
('' स्तम्भ में विशेषण और '' स्तम्भ में विशेष्य दिए गये हैं, उनको सही-सही मिलाओ।)
'क' स्तम्भः ―― 'ख' स्तम्भः
() आस्वाद्यतोयाः - सज्जनानां मैत्री
() गुणयुक्तः - दरिद्रः
() दिनस्य पूर्वार्द्धभिन्ना - नद्यः
() दिनस्य परार्द्धभिन्ना - खलानां मैत्री
उत्तर―
'क' स्तम्भः ―― 'ख' स्तम्भः
() आस्वाद्यतोयाः - नद्यः
() गुणयुक्तः - दरिद्रः
() दिनस्य पूर्वार्द्धभिन्ना - खलानां मैत्री
() दिनस्य परार्द्धभिन्ना - सज्जनानां मैत्री

प्रश्न 4. अधोलिखितयोः श्लोकद्वयोः आशयं हिन्दीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत―
(नीचे लिखे दो श्लोकों का आशय हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में लिखो।)
() आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेण लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात् ।
दिनस्य पूर्वार्द्धपरार्द्धभिन्ना छायेव मैत्री खलसज्जनानाम् ॥
भावार्थ― आरम्भ में लम्बी (बड़ी) फिर धीरे-धीरे घटते (कम होते) स्वभाव वाली तथा पहले छोटी फिर बाद में लम्बी (बड़ी) होती हुई दिन के पूर्वाह्न और अपराह्न काल की छाया की तरह दुष्टों और सज्जनों की मित्रता भी अलग-अलग होती है।

() प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात्तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥
भावार्थ― सभी प्राणी मीठी वाणी बोलने से प्रसन्न (सन्तुष्ट) होते हैं। इसलिए वही (मीठी वाणी) बोलनी चाहिए, बोलने में कैसी कंजूसी? अर्थात् मीठी वाणी में असीम शक्ति होती है। मीठी वाणी से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।

प्रश्न 5. अधोलिखितपदेभ्यः भिन्नप्रकृतिकं चित्वा लिखत―
(नीचे लिखे शब्दों में से भिन्न प्रकृति के शब्द को चुनकर लिखो।)
() वक्तव्यम्, कर्तव्यम्, सर्वस्वम्, हन्तव्यम्।
उत्तर― सर्वस्वम्।

() यत्नेन, वचने, प्रियवाक्यप्रदाने, मरालेन।
उत्तर― वचने।

() श्रूयताम्, अवधार्यताम्, धनवताम्, क्षम्यताम्।
उत्तर― धनवताम्।

() जन्तवः नद्यः, विभूतयः, परितः।
उत्तर― परितः।

प्रश्न 6. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्नवाक्यनिर्माणं कुरुत―
(मोटे शब्दों के आधार पर प्रश्न वाक्यों का निर्माण करो।)

() वृत्ततः क्षीणः हतः भवति।
(चरित्र से हीन का सब कुछ नष्ट होता है।)
प्रश्न निर्माणम्― कस्मात् क्षीणः हतः भवति?
(किससे हीन का सब कुछ नष्ट होता है?)

() धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा अवधार्यताम्।
(धर्म का सार सुनकर धारण करना चाहिए।)
प्रश्न निर्माणम्― किं श्रुत्वा अवधार्यताम् ?
(क्या सुनकर धारण करना चाहिए?)

() वृक्षाः फलं न खादन्ति।
(वृक्ष फल नहीं खाते हैं।)
प्रश्न निर्माणम्― के फलं न खादन्ति?
(कौन फल नहीं खाते हैं?)

() खलानाम् मैत्री आरम्भगुर्वी भवति।
(दुष्टों की मित्रता प्रारम्भ में बढ़ने वाली होती है।)
प्रश्न निर्माणम्― केषाम् मैत्री आरम्भगुर्वी भवति?
(किनकी मित्रता प्रारम्भ में बढ़ने वाली होती है?)

प्रश्न 7. अधोलिखितानि वाक्यानि लोट्लकारे परिवर्तयत―
(नीचे लिखे वाक्यों को लोट्लकार में बदलिए।)
यथा ― सः पाठं पठति।
उत्तर― सः पाठं पठतु।
() नद्यः आस्वाद्यतोयाः सन्ति।
उत्तर― नद्यः आस्वाद्यतोयाः सन्तु।
() सः सदैव प्रियवाक्यं वदति।
उत्तर― सः सदैव प्रियवाक्यं वदतु।
() त्वं परेषां प्रतिकूलानि न समाचरसि।
उत्तर― त्वं परेषां प्रतिकूलानि न समाचार।
() ते वृत्तं यत्नेन संरक्षन्ति।
उत्तर― ते वृत्तं यत्नेन संरक्षन्तु।
() अहं परोपकाराय कार्यं करोमि।
उत्तर― अहं परोपकाराय कार्यं करवाणि।

Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 6 भ्रान्तो बालः

 

Class 9 Sanskrit Shemushi Chapter 6 भ्रान्तो बालः


Textbook Questions and Answers hindi meaning 

प्रश्न: 1. उत्तर एक वाक्य में लिखें


(a)
कौन नींद में है?
(b)
लड़के ने मधुमक्खी को कहाँ जाते देखा?
(c)
कौन शहद इकट्ठा करने में व्यस्त थे?
(d)
बिल्ली घास खाने के लिए क्या उपयोग करती है?
(e)
चमगादड़ किसकी शाखा पर अपना घोंसला बनाता है?
(f)
लड़का किस तरह का कुत्ता देखता है?
(g)
कुत्ता किस तरह के दिन टहलता है?
उत्तर:
(a)
लड़का
(b)
बगीचे में
(c)
मधुमक्खियाँ
(d)
हंस
(e)
केले का पेड़
(f)
भागना


(g)
गर्मी के दिन

प्रश्न: 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अंग्रेजी में लिखें


(a)
बच्चा कब खेलने गया था?
(b)
लड़के के दोस्त जल्दी में क्यों थे?
(c)
मधुमक्खी ने लड़के की पुकार को अस्वीकार क्यों कर दिया?
(d)
लड़के ने किस तरह की छड़ी देखी?
(e)
लड़के ने चाट को खेलने के लिए किस तरह का लालच दिया?
(f)
दुखी लड़के ने कुत्ते से क्या कहा?
(g)
टूटे दिल वाले लड़के ने क्या सोचा?
उत्तर:
(a)
बच्चा स्कूल जाते समय खेलने चला गया।
(b)
बच्चे के दोस्तों को पिछले दिन का पाठ याद गया और वे जल्दी से स्कूल जाने लगे।
(c)
शहद इकट्ठा करने में व्यस्त मधुमक्खी ने लड़के की पुकार को अस्वीकार कर दिया।
(d)
लड़के ने चबाया और घास की सलाखें और अन्य वस्तुएँ ले जाने वाली एक छड़ी देखी।
(e) “
यह सूखी घास छोड़ दो, और मैं तुम्हें स्वादिष्ट खाने योग्य कोकून दूँगा।इसलिए लड़के ने खेलने के लिए चटाई का लालच दिया।
(
) उदास लड़के ने कुत्ते से कहा, "इस गर्मी के दिन तुम क्या कर रहे हो? छत का पसीना, छाया की ठंडक, पेड़ की जड़।"
(
) टूटे दिल वाले लड़के ने सोचा, "इस दुनिया में हर कोई अपने-अपने कामों में व्यस्त है। कोई भी व्यर्थ समय बर्बाद करना बर्दाश्त नहीं करता। मैं उन लोगों को सलाम करता हूँ जिन्होंने मेरी नींद हराम कर दी।"

प्रश्न: 3. निम्नलिखित श्लोक का हिंदी या अंग्रेजी में अर्थ लिखें: "


जो अपने स्वामी के घर में पुत्रवत प्रेम से मेरा पालन-पोषण करता है,
मुझे उसकी रक्षा के कार्य से तनिक भी विचलित नहीं होना चाहिए।"

उत्तर:-  हिंदी भाष्य अर्थ- जब लड़का कुत्ते से खेलने के लिए कहता है, "तुम गर्मी में क्यों घूमते हो? मेरे साथ खेलो," कुत्ता अपने स्वामी के प्रति कर्तव्य दर्शाते हुए कहता है कि स्वामी के घर में मेरा पालन-पोषण पुत्र के समान होता है। मुझे उसकी रक्षा करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। अपने स्वामी की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।

 

प्रश्न: 4.   “भ्रान्तो बालःइति कथायाः सारांशं हिंदीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत।
उत्तरकोई भ्रमित बालक विद्यालय जाकर खेलने में अपना समय बिताता है। विद्यालय जाते हुए मित्रों को देखकर वह आलसी अकेला ही एक बाग में गया। वहाँ भौंरे को बुलाता है, मधुसंचय में व्यस्त भौरे भी उसका साथ देने से इन्कार कर देते हैं। तो बालक चिड़िया को स्वादिष्ट भोजन का लोभ देता है। घोंसले के निर्माण में व्यस्त चिड़िया और स्वामी की रक्षा करता हुआ कुत्ता भी बालक का साथ नहीं देते। बालक सोचता है कि इस संसार में सभी अपने कार्यों में व्यस्त है। वह भी व्यर्थ समय गँवाना छोड़कर विद्यालय जाता है और महान् विद्वता, प्रसिद्धि और सम्पत्ति प्राप्त करता है।

प्रश्न 5.  स्थूल शब्दों के बारे में प्रश्न बनाएँ:
(a)
मैं तुम्हें स्वादिष्ट खाने योग्य गेंदें दूँगा।
(b)
चातक अपने काम में व्यस्त था।
(c)
कुत्ता मनुष्य का मित्र होता है।
(d)
उसने बहुत ज्ञान प्राप्त किया।
(e)
मुझे रक्षा के कार्य से विचलित नहीं होना चाहिए।
उत्तर:  

(a) मैं तुम्हें किस प्रकार की खाने योग्य गेंदें दूँगा?
(b)
चातक किस काम में व्यस्त था?
(c)
कुत्ता किसका मित्र है?
(d)
उसे क्या मिला?
(e)
मुझे भटकना क्यों नहीं चाहिए?

 

प्रश्न 6.
"
एतेभ्यः नमः" के उदाहरण का अनुसरण करते हुए, नमः के संयोजन में चतुर्थ पुरुष एकवचन का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाएँ।
उत्तर:
देवताओं को ॐ।
गणेश ॐ।
माता को ॐ।
पिता को ॐ।
शिवाय।

प्रश्न: 7.
कॉलम 'A' में सभी पदों और कॉलम 'B' में उनके विरोधाभास को देखते हुए, उन्हें उनके दिखने के अनुसार लिखें
"
कॉलम A - कॉलम B
(a)
दृष्टि का मार्ग - (1) फूलों का बगीचा
(b)
पुस्तक दास - (2) ज्ञान के आदी
(c)
ज्ञान के आदी - (3) दृष्टि के पथ
(d)
फूलों का बगीचा - (4) किताबों के गुलाम
उत्तर:
कॉलम 'A' - कॉलम 'B'
(a)
दृष्टि का मार्ग - दृष्टि का मार्ग
(b)
किताबों के गुलाम - किताबों के गुलाम
(c)
सीखने का आदी - सीखने का आदी
(d)
फूलों का बगीचा - फूलों का बगीचा

 

(a) निम्नलिखित पदों के युग्मों में से एक विशेषण है और दूसरा विशेषण है। विशेषण और विशेषण को अलग-अलग चुनकर विशेषण लिखिए।

उत्तर:

परियोजना कार्य

() एक चार्ट-पेपर पर एक बगीचे का चित्र बनाइए या संकलित कीजिए और उसका पाँच वाक्यों में वर्णन कीजिए।
(
) “कड़ी मेहनत का महत्वपर हिंदी या अंग्रेजी में पाँच वाक्य लिखिए।
उत्तर:
(
) बगीचे का चित्र वर्णन
(i)
चित्र में बगीचे का दृश्य दिखाया गया है।
(ii)
बगीचे में सुंदर फूल खिले हैं।
(iii)
यहाँ बच्चे गेंद से खेल रहे हैं।
(iv)
लोग यहाँ आकर व्यायाम करते हैं।
(v)
बच्चों को खेलने में मज़ा आता है।

() परिश्रम का महत्त्व परिश्रम ही मनुष्य की वास्तविक पूजा-अर्चना है। परिश्रम के बिना सफलता प्राप्त नहीं होती। परिश्रमी व्यक्ति अपने कर्म के द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता है। जीवन में परिश्रम से मनुष्य अपनी तकदीर को भी बदल देता है। संसार में मेहनती मनुष्यों को सम्मान मिलता है। सफलता, समृद्धि और प्रसिद्धि की एकमात्र कुंजी परिश्रम ही है।

कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी अध्याय 6 भ्रमित बालक अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

पठन बोध 
I.
पठन सामग्री पर आधारित बोध कार्य

नीचे दिए गए गद्य उदाहरणों को पढ़ें और निर्देशानुसार प्रश्नों के उत्तर दें

 

() एक भ्रमित बच्चा स्कूल जाते समय खेलने चला गया। लेकिन उसके साथ समय बिताने के लिए युवकों में कोई मौजूद नहीं था क्योंकि उन सभी को पिछले दिन का पाठ याद था और वे जल्दी-जल्दी स्कूल जाने की कोशिश कर रहे थे। नींद में डूबा लड़का शरमाते हुए उनकी नज़रों से बचता हुआ अकेले बगीचे में चला गया। उसने सोचा, "इन पेटू किताबों के गुलामों को रोको। मैं अपना मन बहला लूँगा। मैं अब स्कूल नहीं जाना चाहता और ही क्रोधित शिक्षक का चेहरा फिर से देखना चाहता हूँ। झोपड़ी में रहने वाले ये जीव मेरे दोस्त बनें।"

प्रश्न:
I.
एक वाक्य में उत्तर दीजिए
: (i)
बच्चा अकेला कहाँ गया था?
(ii)
बच्चा कैसा था?
उत्तर:
(i)
बगीचा
(ii)
उलझन में

II. पूरे वाक्य में उत्तर दें:
लड़के के दोस्त जल्दी में क्यों थे?
उत्तर:
लड़के के दोस्तों को पिछले दिन का पाठ याद गया और वे स्कूल की ओर दौड़ पड़े।

III. दिए गए विकल्पों में से निर्देशानुसार सही उत्तर चुनिए और लिखिए
(i)
क्रिया 'गया' का कर्ता क्या है?
(a)
उलझन में
(b)
कोई
(c)
बच्चा
(d)
स्कूल
उत्तर:
(c)
बच्चा

 

(ii) 'खेलता है' शब्द के अर्थ में किस शब्द का प्रयोग किया जाता है?
(a)
खेल के साथ
(b)
कुछ
(c)
नींद में
(d)
खेलने के लिए
उत्तर:
(a)
खेल के साथ

(iii) 'उसके और केली के साथ ...........' यहाँ 'द्वारा' सर्वनाम किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(a)
बच्चे का
(b)
बच्चे को
(c)
बच्चे को
(d)
मित्र को
उत्तर:
(b)
बच्चे को

(iv) 'वरकास' शब्द का विशेषण क्या है?
(a)
मैं
(b)
पुस्तक
(c)
पुस्तक दास
(d)
ये उत्तर
उत्तर:
(c)
पुस्तक दास

() फिर उसने मधुमक्खी को फूलों के बगीचे में जाते देखा और उसे खेलने के लिए दो-तीन बार बुलाया। हालाँकि, मधुमक्खी ने इस बच्चे की पुकार को अस्वीकार कर दिया। फिर, बार-बार, बच्चे पर जोर देते हुए, मधुमक्खी ने गाया, "हम शहद इकट्ठा करने में व्यस्त हैं।" तब लड़के ने सोचा, 'बहुत हो गया ये झूठ बोलने वाला कीड़ा,' और दूसरी तरफ देखा, और एक छिपकली को घास ले जाते हुए देखा, और कहा, " छिपकली, तुम आदमी की मेरी दोस्त बनोगी। आओ और खेलो। यह सूखी घास छोड़ दो और मैं तुम्हें स्वादिष्ट भोजन दूंगा। लेकिन उसने कहा, "मैं एक बरगद के पेड़ की शाखा में घोंसला बनाऊंगा," और अपने काम में व्यस्त हो गया।

 

प्रश्न:
I.
एक वाक्य में उत्तर दीजिए:
(i)
मधुमक्खी किस काम में व्यस्त थी?
(ii)
लड़के ने मधुमक्खी को क्यों बुलाया?
उत्तर:
(i)
शहद इकट्ठा करने के लिए
(ii)
खेलने के लिए

II. पूरे वाक्य में उत्तर दें:
लड़के ने चटका से क्या कहा?
उत्तर:
लड़के ने बिल्ली से कहा, "तुम मेरे दोस्त बनोगे। आओ और खेलो। इस घास को सूखा छोड़ दो और मैं तुम्हें स्वादिष्ट खाने योग्य गेंदें दूँगा।"

निर्देशानुसार उत्तर दें
(i) '
घास' शब्द का विशेषण क्या है?
(a)
स्वादिष्ट
(b)
सूखा
(c)
पत्तेदार
(d)
खाने योग्य
उत्तर:
(b)
सूखा

(ii) 'आना' शब्द का समानार्थी शब्द क्या है?
(a)
आना
(b)
जाना
(c)
मैं जा रहा हूँ
(d)
जा रहा हूँ
उत्तर:
(a)
आना

 

(iii) क्रिया 'कहा जाता है' का कर्ता क्या है?
(a)
वह
(b)
मधुमक्खी
(c)
उसे
(d)
तो
उत्तर दें:
(a)
वह

(iv) सर्वनाम 'हम' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(a)
मधुमक्खियों के लिए
(b)
मधुमक्खियों के लिए
(c)
मधुमक्खियों के लिए
(d)
मधुमक्खियों के लिए
उत्तर:
(a)
मधुमक्खियों के लिए

() सबके मना करने पर बालक का हृदय टूट गया: "ऐसा कैसे है कि इस संसार में सब अपने ही कामों में मग्न रहते हैं? मेरे जैसा व्यर्थ समय गँवाना कोई बर्दाश्त नहीं करता। मैं उन लोगों को प्रणाम करता हूँ जिन्होंने मेरी सोई हुई कुतिया को समाप्त कर दिया।" फिर, यह सोचकर कि मैं भी वही करूँगा जो उचित है, वह जल्दी से स्कूल गया। तब से उसे विद्या की लत लग गई और उसने बहुत ज्ञान और धन अर्जित किया।

प्रश्न:
I.
एक वाक्य में उत्तर दें
(i)
इस संसार में हर कोई किसमें डूबा हुआ है?
(ii)
जिस लड़के को सभी ने मना किया था, वह कैसा दिखता था?
उत्तर:
(i)
अपने कर्मों में
(ii)
टूटी हुई इच्छाशक्ति में

II. पूरा वाक्य लिखें:
उस लड़के को विद्या का आदी होने से क्या मिला?
उत्तर:
व्यसनी। बालक बनकर उसने बहुत ज्ञान और धन अर्जित किया।

निर्देशानुसार उत्तर दें
(i) '
घृणा' शब्द का समानार्थी शब्द क्या है?
(a)
नींद
(b)
धन
(c)
रिवाज
(d)
कुतिया
उत्तर:
(d)
कुतिया

(ii) 'मैं' विषय की क्रिया क्या है?
(a)
मैं करता हूँ
(b)
मुझे मिला
(c)
यह होता है
(d)
यह सहन करता है
उत्तर:
(a)
मैं करता हूँ

(iii) 'मेरे जैसा कौन है' में सर्वनाम 'मैं' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(a)
बच्चे को
(b)
बच्चे को
(c)
बच्चे का
(d)
बच्चे को
उत्तर:
(c)
बच्चे का

(iv) 'प्यार' शब्द का विलोम शब्द क्या है?
(a)
कुतिया
(b)
नींद में
(c)
डूबा हुआ
(d)
त्वरित
उत्तर:
(a)
कुतिया

() जो मुझे अपने स्वामी के घर में पुत्र के समान प्रेम से पालता है,
मुझे उसकी रक्षा-व्यवस्था से किंचितमात्र भी विचलित नहीं होना चाहिए।

 

प्रश्न
I.
एक वाक्य में उत्तर दें:
(i)
मालिक कुत्ते को कैसे खाना खिलाता है?
(ii)
किसे सुरक्षा के कार्य से विचलित नहीं होना चाहिए?
उत्तर:
(i)
पुत्र के प्रेम से
(ii)
कुत्ते द्वारा

II. पूरे वाक्य में उत्तर दें:
यह श्लोक कौन किसको सुना रहा है?
उत्तर:
यह श्लोक कुत्ते ने बच्चे को सुनाया है।

निर्देशानुसार उत्तर दें
(i)
सर्वनाम 'मा' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(a)
लड़का
(b)
मालिक
(c)
कुत्ता
(d)
बिल्ली
उत्तर:
(c)
कुत्ता

(ii) 'गिरना' के स्थान पर कौन सा शब्द प्रयुक्त हुआ है?
(a)
पुत्र के प्रति प्रेम से
(b)
कार्यभार से
(c)
भ्रष्ट होना
(d)
थोड़ा सा भी
उत्तर:
(c)
भ्रष्ट होना

(iii) कविता की पहली पंक्ति में क्रिया क्या है?
(a)
अपने बेटे के प्रति प्रेम से
(b)
खिलाता है
(c)
घर पर
(d)
उसका
उत्तर:
(b)
खिलाता है

(iv) 'प्रचुर' शब्द का विलोम शब्द क्या है?
(a)
थोड़ा
(b)
थोड़ा
(c)
भ्रष्ट होना
(d)
असाइनमेंट
उत्तर:
(a)
थोड़ा

II. प्रश्न का निर्धारण

नीचे दिए गए कथनों में मोटे अक्षरों में लिखे पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए
उत्तर
(i)
भ्रमित बच्चा खेलने के लिए बाहर चला गया
(ii) 
लड़के के दोस्तों को स्कूल जाने की जल्दी थी।
(iii) 
पक्षी मनुष्यों के पास नहीं आते।
(iv)
कुत्ता मनुष्यों का मित्र होता है
(v) 
प्रसन्न लड़के ने कुत्ते को संबोधित किया।
(vi)
लड़के ने फूलों के बगीचे में एक मधुमक्खी देखी
प्रश्न
(i)
भ्रमित बच्चा क्यों चला गया?
(ii) 
किसके दोस्तों को स्कूल जाने की जल्दी थी?
(iii) 
कौन मनुष्यों के पास नहीं जाता?
(iv) 
कुत्ता किसका
मित्र है? (v) किस तरह के बच्चे ने कुत्ते को संबोधित किया?
(vi)
लड़के ने मधुमक्खी को कहाँ देखा?

III. 'A' परिणाम है 

निम्नलिखित श्लोक में उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थान भरें:
जो अपने स्वामी के घर में पुत्र के प्रेम से मेरा पालन-पोषण करता है। मुझे सुरक्षा के कार्य से जरा भी विचलित नहीं होना चाहिए। अब तक..
निष्कर्ष: वह जो (i). वह अपने पुत्र के लिए प्रेम से उसे खिलाता है। (ii). मुझे (iii).................. भी (iv).................. मालिक के घर में सुरक्षा कार्य के कारण दूर जाना चाहिए।
उत्तर:
वह जो (i) मुझे पुत्रवत प्रेम से खिलाता है। (ii) मुझे (iii) थोड़ा (iv) अपने स्वामी के घर की रक्षा करने के कर्तव्य से विचलित नहीं होना चाहिए।

III. 'बी' का अर्थ है

निम्नलिखित श्लोक के अर्थ के लिए बॉक्स से उपयुक्त शब्द चुनकर भरें:
(
) जो मुझे अपने स्वामी के घर में पुत्र के समान प्रेम से पालता है,
मुझे उसकी रक्षा करने में तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिए।

अर्थ:-अपने मालिक के प्रति प्रदर्शित कर्तव्य (i)...... भ्रमित बच्चे को बताता है कि उसका (ii) घर पर एक बेटे की तरह (iii)............ उसकी सुरक्षा कुत्ते की सर्वोच्च (iv)...................... है।
बॉक्स- खिलाता है, मालिक, कुत्ता, कर्तव्य |
उत्तर:
एक कुत्ता जिसने अपने मालिक के प्रति वफादारी दिखाई है, भ्रमित बच्चे को बताता है कि उसका मालिक उसे घर पर एक बेटे की तरह पाल रहा है और कुत्ते का सर्वोच्च कर्तव्य उसकी रक्षा करना है।

IV. कहानी अनुक्रमों का संयोजन

निम्नलिखित वाक्यों को घटनाओं के क्रम के अनुसार पुनः लिखें

(i) इस दुनिया में हर कोई अपने काम में कैसे लीन रहता है?
(ii)
तभी से उसे सीखने की लत लग गई और उसने बहुत ज्ञान और धन अर्जित किया।
(iii)
फिर, यह सोचकर कि मैं भी वही करूँगा जो सही था, वह जल्दी से स्कूल गया।
(iv)
एक भ्रमित बच्चा स्कूल जाते समय खेलने चला गया।
(v)
नींद में डूबा लड़का शर्म से उनकी नज़रों से बचते हुए अकेले किसी बगीचे में घुस गया।
(vi)
लेकिन दोस्तों में उसके साथ समय बिताने के लिए कोई भी उपलब्ध नहीं था।
(vii)
फिर उसने मधुमक्खी को फूलों के बगीचे में जाते देखा और उसे दो-तीन बार खेलने के लिए बुलाया।
(viii)
फिर, बार-बार, मधुमक्खी ने गाया, "हम शहद इकट्ठा करने में व्यस्त हैं।"
उत्तर:
(i)
एक भ्रमित बच्चा स्कूल जाते समय खेलने चला गया।
(ii)
लेकिन साथियों में उसके साथ समय बिताने के लिए कोई भी उपलब्ध नहीं था।
(iii)
नींद में डूबा लड़का शर्म से उनकी नज़रों से बचते हुए अकेले किसी बगीचे में घुस गया।
(iv)
फिर उसने मधुमक्खी को फूलों के बगीचे में जाते देखा और उसे दो बार खेलने के लिए बुलाया।
(v)
फिर, बार-बार, मधुमक्खी ने गाया, “हम शहद इकट्ठा करने में व्यस्त हैं।
(vi)
इस दुनिया में हर कोई अपने काम में कैसे लीन है।
(vii)
फिर, यह सोचकर कि मैं भी वही करूँगा जो सही था, वह जल्दी से स्कूल गया।
(viii)
तब से वह सीखने का आदी हो गया और उसने बहुत ज्ञान और धन अर्जित किया।

V. संदर्भ के अनुसार उचित उद्देश्य के लिए 

I. रेखांकित शब्दों का संदर्भ के अनुसार सही अर्थ चुनकर लिखें।
(i)
कोई भी मित्र उपलब्ध नहीं था।
(a)
मित्र
(b)
बच्चे
(c)
पक्षी
(d)
चैट
उत्तर:
(a)
मित्र

(ii) नींद में सोया लड़का बगीचे में आया।
(a)
आलसी
(b)
सरल
(c)
सुंदर
(d)
अच्छा
उत्तर:
(a)
आलसी

(iii) मधुमक्खी को देखकर लड़के ने उसे पुकारा।
(a)
शहद
(b)
मधुमक्खी
(c)
भृंग
(d)
छिपकली
उत्तर:
(c)
भृंग

(iv) लड़के ने कुत्ते को भागते हुए देखा
(a)
शेर
(b)
चूहा
(c)
बिल्ली
(d)
कुत्ता
उत्तर:
(d)
कुत्ता

(v) बच्चा, जिसे सभी ने मना किया , टूटा हुआ दिल
बन गया। (a) टूटी हुई इच्छा
(b)
पूरी हुई इच्छा
(c)
पूरी हुई इच्छा
(d)
स्वीकार किया हुआ
उत्तर:
(a)
टूटी हुई इच्छा

VI. समानार्थी/विलोम

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
विद्यालय, फूल, बगीचा, मधुकोश
उत्तर:
विद्यालय - विद्यालय, संस्थान, विश्वविद्यालय।
फूल - फूल, फूल, पुष्प।
बगीचा - बाग, उप-उद्यान, पुष्पित
मधुकोश - मधुमक्खी, मिलिंदा, अली।

प्रश्न 2.
कॉलम '' में शब्द और कॉलम 'बी' में उनके विलोम शब्द दीजिए। उन्हें चुनकर शब्दों के आगे लिखिए
कॉलम - कॉलम 'बी'
(
) मास्टर - प्यार
(
बी) कुतिया - नौकर
(
सी) अनुरूप - स्वीकार किया गया
(
डी) निषिद्ध - अनुरूप नहीं
(
) सूखा - गीला
उत्तर:
कॉलम - कॉलम 'बी'
(
) मास्टर - नौकर
(
बी) कुतिया - प्यार
(
सी) अनुरूप - अनुरूप नहीं
(
डी) निषिद्ध - स्वीकार किया गया
(
) सूखा - गीला






Textbook Questions and Answers 

प्रश्न: 1. एकपदेन उत्तरं लिखत

() कः तन्द्रालुः भवति?
(
) बालकः कुत्र व्रजन्तं मधुकरम् अपश्यत्?
(
) के मधुसंग्रहव्यग्राः अवभवन्?
(
) चटकः कया तृणशलाकादिकम् आददाति?
(
) चटकः कस्य शाखायां नीड रचयति?
(
) बालकः कीदृशं श्वानं पश्यति?
(
) श्वानः कीदृशे दिवसे पर्यटति?
उत्तर:
(
) बालकः
(
) उद्याने
(
) मधुकराः
(
) चञ्चवा
(
) वटदुमस्य
(
) पलायमानम्
(
) निदाघदिवसे

प्रश्न: 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
(
) बालः कदा क्रीडितुं अगच्छत्?
(
) बालस्य मित्राणि किमर्थं त्वरमाणा अभवन्?
(
) मधुकरः बालकस्य आह्वान केन कारणेन तिरस्कृतवान्?
(
) बालकः कीदृशं चटकम् अपश्यत्?
(
) बालकः चटकाय क्रीडनार्थं कीदृशं लोभं दत्तवान्?
(
) खिन्नः बालकः श्वानं किम् अकथयत्?
(
) भग्नमनोरथः बालः किम् अचिन्तयत्?
उत्तर:
(
) बालः पाठशालागमनवेलायां क्रीडितुं अगच्छत्।
(
) बालस्य मित्राणि पूर्वदिनपाठान् स्मृत्वा विद्यालयगमनाय त्वरमाणा अभवन्।
(
) मधुसंग्रहव्यग्रः मधुकरः बालकस्य आह्वानं तिरस्कृतवान्।
(
) बालकः चञ्च्वा तृणशलाकादिकम् आददानम् एकं चटकम् अपश्यत्।
(
) “एतत् शुष्कं तृणं त्यज, स्वादूनि भक्ष्यकवलानि ते दास्यामि।इति बालकः चटकाय क्रीडनार्थं लोभं दत्तवान्।
(
) खिन्नः बालकः श्वानं अकथयत्, “अस्मिन् निदाघदिवसे किं पर्यटसि? आश्रयस्वेदं प्रच्छायशीतलं तरुमूलम्। अहम् अपि क्रीडासहायं त्वाम् एव अनुरूपं पश्यामि।
(
) भग्नमनोरथः बालः अचिन्तयत्, “अस्मिन् जगति प्रत्येकं स्व-स्वकृत्ये निमग्नः भवति। कोऽपि वृथा कालक्षेपं सहते। एतेभ्यः नमः यैः मे तन्द्रालुतायाम् कुत्सा समापादिता।

प्रश्न: 3.
निम्नलिखितस्य श्लोकस्य भावार्थं हिन्दीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत
यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य।
रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि।।
उत्तर:
हिंदी भाषया भावार्थ-बालक जब कुत्ते से खेलने के लिए कहता है कि गर्मी में क्यों घूमते हो? मेरे साथ खेलो तो कुत्ता अपने स्वामी के प्रति कर्त्तव्यपरायणता दिखाता हुआ कहता है कि जिस स्वामी के घर में पुत्र के समान मेरा पोषण होता है। उसकी रक्षा करने से मुझे नहीं हटना चाहिए। अपने स्वामी की रक्षा करना मेरा कर्त्तव्य है।

 

प्रश्न: 4.
भ्रान्तो बालःइति कथायाः सारांशं हिंदीभाषया आङ्ग्लभाषया वा लिखत।
उत्तर:
कोई भ्रमित बालक विद्यालय जाकर खेलने में अपना समय बिताता है। विद्यालय जाते हुए मित्रों को देखकर वह आलसी अकेला ही एक बाग में गया। वहाँ भौंरे को बुलाता है, मधुसंचय में व्यस्त भौरे भी उसका साथ देने से इन्कार कर देते हैं। तो बालक चिड़िया को स्वादिष्ट भोजन का लोभ देता है। घोंसले के निर्माण में व्यस्त चिड़िया और स्वामी की रक्षा करता हुआ कुत्ता भी बालक का साथ नहीं देते। बालक सोचता है कि इस संसार में सभी अपने कार्यों में व्यस्त है। वह भी व्यर्थ समय गँवाना छोड़कर विद्यालय जाता है और महान् विद्वता, प्रसिद्धि और सम्पत्ति प्राप्त करता है।

प्रश्नः 5.
स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(
) स्वादूनि भक्ष्यकवलानि ते दास्यामि।
(
) चटकः स्वकर्मणि व्यग्रः आसीत्।
(
) कुक्कुरः मानुषाणां मित्रम् अस्ति।
(
) महती वैदुषीं लब्धवान्।
(
) रक्षानियोगकरणात मया भ्रष्टव्यम् इति।
उत्तर:
(
) कीदृशानि भक्ष्यकवलानि ते दास्यामि?
(
) चटकः कस्मिन् व्यग्रः आसीत्?
(
) कुक्कुरः केषाम् मित्रम् अस्ति?
(
) सः कीदृशीं लब्धवान्?
(
) कस्मात् मया भ्रष्टव्यम् इति?

 

प्रश्नः 6.
एतेभ्यः नमःइति उदाहरणमनुसृत्य नमः इत्यस्य योगे चतुर्थी विभक्तेः प्रयोगं कृत्वा पञ्चवाक्यानि रचयत।
उत्तर:
देवेभ्य नमः।
गणेशाय नमः।
मात्रे नमः।
पित्रे नमः।
शिवाय नमः।

प्रश्न: 7.
स्तम्भे समस्तपदानिस्तम्भे तेषां विग्रहः दत्तानि, तानि यथासमक्षं लिखत
स्तम्भ — ‘स्तम्भ
(
) दृष्टिपथम् — (1) पुष्पाणाम् उद्यानम्
(
) पुस्तकदासाः — (2) विद्यायाः व्यसनी
(
) विद्याव्यसनी — (3) दृष्टेः पन्थाः
(
) पुष्पोद्यानम् — (4) पुस्तकानां दासाः
उत्तर:
स्तम्भ — ‘स्तम्भ
(
) दृष्टिपथम्दृष्टेः पन्थाः
(
) पुस्तकदासाःपुस्तकानां दासाः
(
) विद्याव्यसनीविद्यायाः व्यसनी
(
) पुष्पोद्यानम्पुष्पाणाम् उद्यानम्

 

() अधोलिखितेषु पदयुग्मेषु एकं विशेष्यपदम् अपरञ्च विशेषणपदम्। विशेषणपदम् विशेष्यपदं पृथक्-पृथक् चित्वा लिखत विशेषणम्

उत्तर:

परियोजनाकार्यम

() एकस्मिन् स्फोरकपत्रे (chart-paper) एकस्य उद्यानस्य चित्र निर्माय संकलय्य वा पञ्चवाक्येषु तस्य वर्णनं कुरुत।
(
) “परिश्रमस्य महत्त्वम्इति विषये हिन्दी भाषया आङ्ग्लभाषया वा पञ्चवाक्यानि लिखत।
उत्तर:
(
) उद्यानस्य चित्रवर्णनम्
(i)
चित्रे उद्यानस्य दृश्यम् दृश्यते।
(ii)
उद्याने सुन्दराणि पुष्पाणि विकसन्ति।
(iii)
अत्र बालाः कन्दुकेन क्रीडन्ति।
(iv)
जनाः अत्र आगत्य व्यायामम् अपि कुर्वन्ति।
(v)
क्रीडन्तः बालकाः आनन्दम् अनुभवन्ति।

() परिश्रम का महत्त्व परिश्रम ही मनुष्य की वास्तविक पूजा-अर्चना है। परिश्रम के बिना सफलता प्राप्त नहीं होती। परिश्रमी व्यक्ति अपने कर्म के द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता है। जीवन में परिश्रम से मनुष्य अपनी तकदीर को भी बदल देता है। संसार में मेहनती मनुष्यों को सम्मान मिलता है। सफलता, समृद्धि और प्रसिद्धि की एकमात्र कुंजी परिश्रम ही है।

पठित-अवबोधनम् 
I.
पठित-सामग्रयाम् आधारितम् अवबोधनकार्यम्

अधोलिखित गद्याशान् पठित्वा निर्देशानुसारं प्रश्नान् उत्तरत

 

() भ्रान्तः कश्चन बालः पाठशालागमनवेलायां क्रीडितुम् अगच्छत्। किन्तु तेन सह केलिभिः कालं क्षेप्तुं तदा कोऽपि वयस्येषु उपलभ्यमान आसीत्। यतः ते सर्वेऽपि पूर्वदिनपाठान् स्मृत्वा विद्यालयगमनाय त्वरमाणाः अभवन्। तन्द्रालुः बालः लज्जया तेषां दृष्टिपथमपि परिहरन् एकाकी किमपि उद्यानं प्राविशत्। सः अचिन्तयत्-“विरमन्तु एते वराकाः पुस्तकदासाः। अहं तु आत्मानं विनोदयिष्यामि। सम्प्रति विद्यालयं गत्वा भूयः क्रुद्धस्य उपाध्यायस्य मुखं द्रष्टुं नैव इच्छामि। एते निष्कुटवासिनः प्राणिन एव मम वयस्याः सन्तु इति।

प्रश्ना:
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
बालः एकाकी एव कुत्र प्राविशत्?
(ii)
बालः कीदृशः आसीत्?
उत्तर:
(i)
उद्यानम्
(ii)
भ्रान्तः

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
बालकस्य वयस्याः किमर्थं त्वरमाणाः अभवन् ?
उत्तर:
बालकस्य वयस्याः पूर्वदिनपाठान् स्मृत्वा विद्यालय-गमनाय त्वरमाणाः अभवन्

III. निर्देशानुसारम् उचितम् उत्तरं प्रदत्तविकल्पेभ्यः चित्वा लिखत
(i) ‘
अगच्छत्इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
(
) भ्रान्तः
(
) कश्चन्
(
) बालः
(
) पाठशाला
उत्तर:
(
) बालः

 

(ii) ‘क्रीडाभिःइति पदस्य अर्थे किं पदम् प्रयुक्तम्?
(
) केलिभिः
(
) किमपि
(
) तन्द्रालु
(
) क्रीडितुम्
उत्तर:
(
) केलिभिः

(iii) ‘तेन सह केलिभिः ………..’ अत्रतेनइति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्।
(
) बालकस्य
(
) बालाय
(
) बालः
(
) मित्राय
उत्तर:
(
) बालाय

(iv) ‘वराकाःइति पदस्य विशेष्यपदं किम्?
(
) अहम्
(
) पुस्तक
(
) पुस्तकदासाः
(
) एते उत्तराणि
उत्तर:
(
) पुस्तकदासाः

() अथ सः पुष्पोद्यानं व्रजन्तं मधुकरं दृष्ट्वा तं क्रीडितुम् द्वित्रिवारं आह्वयत्। तथापि, सः मधुकरः अस्य बालस्य आह्वानं तिरस्कृतवान्। ततो भूयो भूयः हठमाचरति बाले सः मधुकरः अगायत् – “वयं हि मधुसंग्रहव्यग्राइति। तदा बालःअलं भाषणेन अनेन मिथ्यागवितेन कीटेनइति विचिन्त्य अन्यत्र दत्तदृष्टि: चञ्च्वा तृणशलाकादिकम् आददानम् एकं चटकम् अपश्यत्, अवदत् -“अयि चटकपोत! मानुषस्य मम मित्रं भविष्यसि। एहि क्रीडावः। एतत् शुष्कं तृणं त्यज स्वादूनि भक्ष्यकवलानि ते दास्यामिइति। तुमया वटदुमस्य शाखायां नीडं कार्यम्इत्युक्त्वा स्वकर्मव्यग्रोः अभवत्।

 

प्रश्ना:
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
मधुकरः कस्मिन् व्यग्रः आसीत्?
(ii)
बालकः मधुकरं किमर्थं आह्वयत्?
उत्तर:
(i)
मधुसंग्रहे
(ii)
क्रीडितुम्

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
बालकः चटकाय किम् अकथयत्?
उत्तर:
बालक चटकाय अकथयत्, “मानुषस्य मम मित्रं भविष्यसि। एहि क्रीडावः। त्यज शुष्कमेतत् तृणं स्वादूनि भक्ष्यकवलानि ते दास्यामि।

III. यथानिर्देशम् उत्तरत
(i) ‘
तृणंइति पदस्य विशेषणपदं किम्?
(
) स्वादूनि
(
) शुष्कम्
(
) त्यज
(
) भक्ष्य
उत्तर:
(
) शुष्कम्

(ii) ‘आंगच्छइति पदस्य समानार्थकपदं किम्?
(
) एहि
(
) त्यज
(
) यामि
(
) व्रजन्तम्
उत्तर:
(
) एहि

 

(iii) ‘आह्वयत्इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
(
) सः
(
) मधुकरं
(
) तं
(
) अथ
उत्तर:
(
) सः

(iv) ‘वयंइति सर्वनामपदं केभ्यः प्रयुक्तम्?
(
) मधुकरेभ्यः
(
) मधुकरं
(
) मधुकराय
(
) मधुकरः
उत्तर:
(
) मधुकरेभ्यः

() सर्वैः एवं निषिद्धः बालो भग्नमनोरथः सन्- ‘कथमस्मिन् जगति प्रत्येकं स्व-स्वकार्ये निमग्नो भवति। कोऽपि मामिव वृथा कालक्षेपं सहते। नम एतेभ्यः यैः मे तन्द्रालुतायां कुत्सा समापादिता। अथ स्वोचितम् अहमपि करोमि इति विचार्य त्वरितं पाठशालाम् अगच्छत्।ततः प्रभृति विद्याव्यसनी भूत्वा महती वैदुषी प्रथां सम्पदं अलभत।

प्रश्ना :
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
अस्मिन् जगति प्रत्येकं कस्मिन् निमग्नः भवति?
(ii)
सर्वैः निषिद्धः बालकः कीदृशः अभवत्?
उत्तर:
(i)
स्व-स्वकृत्ये
(ii)
भग्नमनोरथः

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
विद्याव्यसनी भूत्वा सः बालकः किम् लब्धवान्।
उत्तर:
विद्याव्यसनी. भूत्वा सः बालकः महती वैदुषी प्रथाम् सम्पदं लब्धवान्।

III. निर्देशानुसारम् उत्तरत
(i) ‘
घृणाइति पदस्य पर्यायपदं किम्?
(
) तन्द्रा
(
) सम्पदं
(
) प्रथा
(
) कुत्सा
उत्तर:
(
) कुत्सा

(ii) ‘अहम्इति कर्तृपदस्य क्रियापदम् किम्?
(
) करोमि
(
) लेभे
(
) भवति
(
) सहते
उत्तर:
(
) करोमि

(iii) ‘कः अपि अहम् इवअत्रअहम्इति सर्वनामपदं कस्य कृते प्रयुक्तम्?
(
) बालकाय
(
) बालकं
(
) बालकस्य
(
) बालकः
उत्तर:
(
) बालकस्य

(iv) ‘प्रेमइति पदस्य विपरीतार्थकं पदं किम्?
(
) कुत्सा
(
) तन्द्रा
(
) निमग्नः
(
) त्वरितं
उत्तर:
(
) कुत्सा

() यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य।
रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि॥ इति।

 

प्रश्नाः
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
स्वामी कुक्कुरम् कथम् पोषयति?
(ii)
रक्षानियोगकारणत् केन भ्रष्टव्यम्?
उत्तर:
(i)
पुत्रप्रीत्या
(ii)
कुक्कुरेन

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
इदम् श्लोकं कः कम् कथयति?
उत्तर:
इदम् श्लोकं कुक्कुरः बालकं कथयति।

III. निर्देशानुसारम् उत्तरत
(i) ‘
माइति सर्वनामपदं कस्य कृते प्रयुक्तम्?
(
) बालकस्य
(
) स्वामिनः
(
) कुक्कुरस्य
(
) चटकस्य
उत्तर:
(
) कुक्कुरस्य

(ii) ‘पतितव्यम्इति पदस्य स्थाने किं पदं प्रयुक्तम्?
(
) पुत्रप्रीत्या
(
) नियोग
(
) भ्रष्टव्यम्
(
) ईषदपि
उत्तर:
(
) भ्रष्टव्यम्

(iii) श्लोके प्रथमे पंक्तौ क्रियापदं किम्?
(
) पुत्रप्रीत्या
(
) पोषयति
(
) गृहे
(
) तस्य
उत्तर:
(
) पोषयति

(iv) ‘प्रभूतंइति पदस्य विपरीतार्थकं पदं किम्?
(
) ईषत्
(
) मीषद्
(
) भ्रष्टव्यम्
(
) नियोग
उत्तर:
(
) ईषत्

II. प्रश्नानमर्माणम्

अधोलिखित कथनेषु स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं क्रियताम्
उत्तराणि
(i)
भ्रान्तः बालः क्रीडितुं निष्क्रान्तः।
(ii) 
बालकस्य मित्राणि विद्यालयगमनाय त्वरमाणाः आसन्।
(iii) 
पक्षिणः मानुषेषु उपगच्छन्ति।
(iv)
कुक्कुरः मानुषाणां मित्रम् अस्ति।
(v) 
प्रीतः बालः कुक्कुरम् सम्बोधयामास।
(vi)
बालकः पुष्पोद्याने मधुकर अपश्यत्।
प्रश्नाः
(i)
भ्रान्तः बालः किमर्थं निष्क्रान्तः?
(ii) 
कस्य मित्राणि विद्यालयगमनाय त्वरमाणाः आसन्?
(iii) 
के मानुषेषु उपगच्छन्ति?
(iv)
कुक्कुरः केषाम् मित्रम् अस्ति?
(v) 
कीदृशः बालः कुक्कुरम् सम्बोधयामास?
(vi)
बालकः कुत्र मधुकरं अपश्यत्?

III. ‘अन्वयः 

अधोलिखितस्य श्लोकस्य अन्वये रिक्तस्थानानां पूर्तिं समुचितपदैः कुरुतः
यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य। रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि।। इति।।
अन्वयः-यो (i)……. पुत्रप्रीत्या पोषयति। (ii)……. स्वामिनः गृहे रक्षानियोगकारणत् मया (iii)……………….. अपि (iv)……………… भ्रष्टव्यम्।
उत्तर:
यो (i) मां पुत्रप्रीत्या पोषयति। (ii) तस्य स्वामिनः गृहे रक्षानियोगकारणात् मया (iii) ईषद् अपि (iv) भ्रष्टव्यम्।

III. ‘भावार्थः

निम्नलिखितश्लोकस्यः भावार्थं मञ्जूषातः उचितपदानि चित्वा पूरयत
(
) यो मां पुत्रप्रीत्या पोषयति स्वामिनो गृहे तस्य।
रक्षानियोगकरणान्न मया भ्रष्टव्यमीषदपि।।

भावार्थ:-स्वस्वामिनं प्रति कर्त्तव्यनिष्ठा प्रदर्शितः (i)…… भ्रान्तं बालं कथयति यत् तस्य (ii)…………. गृहे पुत्रस्य सदृशं (iii)………… तस्य रक्षणम् एव कुक्कुरस्य परमं . (iv)………………… अस्ति
मञ्जूषा- पोषयति, स्वामी, कुक्कुरः, कर्त्तव्यं |
उत्तर:
स्वस्वामिनं प्रति कर्तव्यनिष्ठा प्रदर्शितः कुक्कुरः भ्रान्तं बालं कथयति यत् तस्य स्वामी गृहे पुत्रस्य सदृशं पोषयति तस्य रक्षणम् एव कुक्कुरस्य परमं कर्त्तव्यं अस्ति।

IV. कथाक्रमसंयोजनम्

घटनाक्रमानुसारम् अधोलिखितानि वाक्यानि पुनः लेखनीयानि

(i) कथमस्मिन् जगति प्रत्येकं स्व-स्वकार्ये निमग्नो भवति।
(ii)
ततः प्रभृति सः विद्याव्यसनी भूत्वा महती वैदुषी प्रथां सम्पदं अलभत।
(iii)
अथ स्वोचितम् अहमपि करोमि इति विचार्य त्वरितं पाठशालाम् अगच्छत्।
(iv)
भ्रान्तः कश्चन् बालः पाठशालागमनवेलायां क्रीडितुं अगच्छत्।
(v)
तन्द्रालुः बाल: लज्जया तेषाम् दृष्टिपथमपि परिहरन् एकाकी किमपि उद्यानं प्राविशत्।
(vi)
किन्तु तेन सह केलिभिः कालं क्षेप्तुं तदा कोऽपि वयस्येषु उपलभ्यमान आसीत्।
(vii)
अथ सः पुष्पोद्यानं व्रजन्तं मधुकरं दृष्ट्वा तं क्रीड़ितुम् द्वित्रिवारम् आह्वयत्।
(viii)
ततो भूयो भूयः हठमाचरति बाले सः मधुकरः अगायत-“वयं हि मधुसंग्रहव्यग्राइति।
उत्तर:
(i)
भ्रान्तः कश्चन् बालः पाठशालागमनवेलायां क्रीडितुं अगच्छत्।
(ii)
किन्तु तेन सह केलिभिः कालं क्षेप्तुं तदा कोऽपि वयस्येषु उपलभ्यमान आसीत्।
(iii)
तन्द्रालुः बालः लज्जया तेषाम् दृष्टिपथमपि परिहरन् एकाकी किमपि उद्यानं प्राविशत्।
(iv)
अथ सः पुष्पोद्यानं व्रजन्तं मधुकरं दृष्ट्वा तं क्रीडितुम् द्वित्तिवारम् आह्वयत्।
(v)
ततो भूयो भूयः हठमाचरति बाले सः मधुकरः अगायत्-“वयं हि मधुसंग्रहव्यग्राइति।
(vi)
कथमस्मिन् जगति प्रत्येकं स्व-स्वकार्ये निमग्नो भवति।
(vii)
अथ स्वोचितम् अहमपि करोमि इति विचार्य त्वरितं पाठशालाम् अगच्छत्।
(viii)
ततः प्रभृति सः विद्याव्यसनी भूत्वा महतीं वैदुषी प्रथा सम्पदं अलभत।

V. प्रसङ्गानुकूलम् उचितार्थम् 

I. रेखांकितपदानाम् प्रसङ्गानुसारं शुद्धम् अर्थं चित्वा लिखत
(i)
कोऽपि वयस्येषु उपलभ्यमानः आसीत्।
(
) मित्रेषु
(
) बालकेषु
(
) खगेषु
(
) चटकासु
उत्तर:
(
) मित्रेषु

(ii) तन्द्रालुः बालः उद्यानं प्रविवेश।
(
) अलसः
(
) सरलः
(
) सुन्दरः
(
) उत्तमः
उत्तर:
(
) अलसः

(iii) मधुकरं दृष्ट्वा बालकः तम् आह्वयत्।
(
) मधु
(
) मक्षिका
(
) भ्रमरं
(
) चटकं
उत्तर:
(
) भ्रमरं

(iv) बालकः पलायमानं श्वानम् अवलोकयत्।
(
) सिंहम्
(
) मूषकम्
(
) बिडालम्
(
) कुक्कुरम्
उत्तर:
(
) कुक्कुरम्

(v) सर्वैः निषिद्धः बालः भग्नमनोरथः अभवत्।
(
) खण्डितकामः
(
) पूर्णकामः
(
) पूर्णमनोरथः
(
) स्वीकृतः
उत्तर:
(
) खण्डितकामः

VI. पर्यायपदानि/विलोमपदानि

प्रश्नः 1.
अधोलिखितपदानां पर्यायपदानि लिखत
पाठशाला, पुष्पं, उद्यान, मधुकरः
उत्तर:
पाठशालाविद्यालयः, शिक्षालयः, विद्यापीठः।
पुष्पंसुमनम्, कुसुमम्, प्रसूनम्।
उद्यानंवाटिका, उपवनं, कुसुमाकरः
मधुकरःभ्रमरः, मिलिंदः, अलिः।

प्रश्नः 2.
स्तम्भे पदानि, ‘स्तम्भे तेषां विलोमपदानि दत्तानि। तानि चित्वा पदानां समक्षं लिखत
स्तम्भः — ‘स्तम्भः
(
) स्वामिनःप्रेम
(
) कुत्साभृत्यस्य
(
) अनुरूपम्स्वीकृतः
(
) निषिद्धःअननुरूपम्
(
) शुष्कंआर्द्रम्
उत्तर:
स्तम्भः — ‘स्तम्भः
(
) स्वामिनःभृत्यस्य
(
) कुत्साप्रेमम्
(
) अनुरूपम्अननुरूपम्
(
) निषिद्धःस्वीकृतः
(
) शुष्कंआर्द्रम्

 


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