बीमारी से छुटकारा पाने का उपाय || बीमारी से बचने के उपाय

 बीमारी से छुटकारा पाने का उपाय || बीमारी से बचने के उपाय 

सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी !
एक रुपये का सिक्का रात को सिरहाने में रख कर सोएं और सुबह उठकर उसे श्मशान के आसपास फेंक देंरोग से मुक्ति मिल जाएगी।
                      

लगातार बुखार आने पर
1. यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !

2. बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :
एक काला रेशमी डोरा लें ! ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !

4. प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !

5.  यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !

6॰ सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।
रोगी को ठीक करने के लिए :- कृष्ण पक्ष में अमावस्या की रात को 12 बजे नहा-धोकर नीले रंग के वस्त्र ग्रहण करें। आसन पर नीला कपड़ा बिछाकर पूर्व की ओर मुख करके बैठे। इसके पश्चात चौमुखी दीपक (चार मुँह वाला जलाएँ। (निम्न सामग्री पहले से इकट्‍ठी करके रख लें) नीला कपड़ा सवा गज – 4 मीटर चौमुखी दिए 40 नगमिट्‍टी की गड़वी नगसफेद कुशासन(कुश का आसन) नगबत्तियाँ 51 नगछोटी इलायची 11 दानेछुहारे (खारक) नगएक नीले कपड़े का रूमालदियासलाईलौंग 11 दानेतेल सरसों किलो इत्र व शीशी गुलाब के फूल नगगेरू का टुकड़ा, 1 लडडू और लड्डू के टुकड़े 11 नग।

विधि - नीले कपड़े के चारों कोने में लड्‍डूलौंगइलायची एवं छुहारे बाँध लेंफिर‍ मिट्‍टी के बर्तन में पानी भरकरगुलाब के फूल भी वहाँ रख लें। फिर नीचे लिखा मंत्र पढ़ें। मंत्र पढ़ते समय लोहे की चीज (दियासलाई) से अपने चारों ओर लकीर खींच लें।
मंत्र इस प्रकार है।

ऊँ अनुरागिनी मैथन प्रिये स्वाहा।
शुक्लपक्षेजपे धावन्ताव दृश्यते जपेत्।।

यह मंत्र चालीस दिन लगातार पढ़ें, (सवा लाख बार) सुबह उठकर नदी के पानी में अपनी छाया को देखें। जब मंत्र संपूर्ण हो जाएँ तो सारी सामग्री (नीले कपड़े सहित) पानी में बहा दें।
अब जिसको आप अपने वश में करना चाहते हैं अथवा जिस किसी रोगी का इलाज करना चाहते हैंउसका नाम लेकर इस मंत्र को 1100 बार पढ़ेंबस आपका काम हो जाएगा।

यदि घर के छोटे बच्चे पीड़ित होंतो मोर पंख को पूरा जलाकर उसकी राख बना लें और उस राख से बच्चे को नियमित रूप से तिलक लगाएं तथा थोड़ी-सी राख चटा दें।

 यदि बीमारी का पता नहीं चल पा रहा हो और व्यक्ति स्वस्थ भी नहीं हो पा रहा होतो सात प्रकार के अनाज एक-एक मुट्ठी लेकर पानी में उबाल कर छान लें। छने व उबले अनाज (बाकले) में एक तोला सिंदूर की पुड़िया और ५० ग्राम तिल का तेल डाल कर कीकर (देसी बबूल) की जड़ में डालें या किसी भी रविवार को दोपहर १२ बजे भैरव स्थल पर चढ़ा दें।

बदन दर्द होतो मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सिक्का चढ़ाकर उसमें लगी सिंदूर का तिलक करें।


पानी पीते समय यदि गिलास में पानी बच जाएतो उसे अनादर के साथ फेंकें नहींगिलास में ही रहने दें। फेंकने से मानसिक अशांति होगी क्योंकि पानी चंद्रमा का कारक है।

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